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यहां विवाह के लिये लड़कियों को शरीर पर टैटू बनवाना है जरूरी

Rochak Khabare 2017-08-10 16:11:59

शहरों में जिस तरह से लोगों में शरीर पर टैटू बनवाने का प्रचलन है वहीं छतीसगढ के गांवों की गोदना कला प्रसिद्ध है। बस्तर की लोक संस्कृति में रची बसी इस गोदना आर्ट न केवल वहां के गोंड समाज बल्कि वरन माडिसा, मुरिया समाज व हिंदू समाज में भी बहुत प्रचलित है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां जिस लड़की के गोदना नही है उसका विवाह भी नहीं किया जाता।

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बताया जाता है कि औरतों के श्रृंगार के अलावा कई बीमारियों का उपचार भी इस कला के माध्यम से होता है।दरअसल यहां कि महिलाएं ठंड के मौसम में ही गोदना गोदवाती है, जबकि गर्मी के दिनों में ऐसा नहीं किया जाता है। बस्तर की इस कला से कई लोग और सरकार अनजान है इस वजह से इस कला को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।

गोदना कलाकारों का बताना है कि गोंडवाना समाज में यह मान्यता है कि गोदना कला जीवन के अंत समय तक शरीर में मौजूद रहती है और आत्मा के साथ मिल जाती है। उन्होंने बताया कि बस्तर की गोदना कला का डिजाइन अन्य राज्यों से अलग है।

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