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यूएस के इस होटल में बचे साबुन का ऐसे करते प्रयोग

Dainik Savera Times 2017-08-11 16:30:17

हमारे भारत में हर कोई होटलो में जाते है। होटल से मिले साबुन और शेम्पू को आप यूज़ करते है। क्या आपको पता है कि आपकेहोटल से चले जाने के बाद होटल में उन अधूरे यूज़ अधूरे यूज़ किये साबुनो से क्या किया जाता है।

यूएस में एक होटल ऐसा है जहां 4.6 मिलियन कमरे हैं। सिर्फ यूएस में ही इतने सारे कमरे है, और जाहिर सी बात है कि यहां रूकने वाले सभी मेहमान तो पूरे साबुन का इस्ते माल नहीं कर पाते होंगें। सिर्फ साबुन ही नहीं बल्कि अलग-अलग शैंपू और कंडीश्नर के कंटेनर्स भी आधे बच ही जाते हैं।लेकिन ये होटल इन बचे साबुनो को फेंकती नहीं है बल्कि इसका रिसाईक्लिंग करती है।

इन चीज़ों को बर्बादी से बचाने के लिए ‘क्लीन द वर्ल्ड ' नामक संस्था ‘ग्लोबल सोप प्रोजक्ट' के साथ मिलकर साझेदारी में एक ऐसी मुहिम चला रही है जिसके तहत आधे प्रयोग किए गए साबुन को नया साबुन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन साबुनों को विकासशील देशों के लिए बनाया जाता है और इससे चीज़ें बर्बाद भी नहीं होती हैं।

इस मुहिम की की उन क्षेत्रों में बहुत जरूरत है जहां स्वच्छ पानी, सफाई और सैनिटेशन की सुविधाओं का अभाव है। इन कारणों से बड़ी संख्या में लोग निमोनिया और डायरिया के शिकार हो जाते हैं। साबुन के प्रयोग से इन लोगों में स्वच्छता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इन आधे इस्ते‍माल किए गए साबुनों और अन्य चीज़ों को रिसाईकल करने में एक कमरे का महीने का खर्च 75 सेंट्स आता है। बचे हुए साबुन, बॉडी वॉश, शैंपू, कंडीश्नर को साफ कर उन्हें कीटाणुरहित बनाया जाता है और फिर उन्हें शुद्धता के लिए जांचा जाता है। इसके बाद ही इन चीज़ों को दूसरे लोगों के प्रयोग के लिए भेजा जाता है।

कुछ होटल अपने इस्तेमाल की गई टॉयलेटरीज़ को वहां रहने वाले गरीबों, बेसहारा महिलाओं और कम्युनिटी सपोर्ट नेटवर्क को दान कर देते हैं जबकि कुछ होटल्स लोकल सैल्वेशन आर्मी और कुछ लोकल क्लीनिक और अनाथों में इन्हें दान कर देते हैं।
ऐसे भी हैं होटल्स
कई होटल्स बची हुई चीज़ों को दान करने या उन्हें रिसाईकिल के लिए भेजने की जगह उन्हें रिफिल कर देती हैं। इससे वो अपना पैसा बचाना चाहती हैं लेकिन ये चीज़ें उनके मेहमानों को कोई बीमारी दे सकती हैं।