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धमकियों की भभकी, चीन के लिए आसान नहीं है भारत से जंग

Newstrack Hindi 2017-08-11 19:03:21

चीन और भारत के बीच विवाद का मुद्दा बने डोकलाम विवाद का जल्द हल निकलता नहीं दिख रहा है। चीन की ओर से भारत को लगभग रोज जंग की धमकी दी जा रही है और भारत भी इन धमकियों का जवाब दे रहा है। चीन भारत को लगातार धमकियां भले दे रहा हो मगर उसका भी कड़ा रुख पहले से बदला है। भारत के कड़े रुख के बाद चीन ने भी माना है कि इस इलाके को लेकर भूटान से विवाद है।

हालांकि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स व चाइना डेली की ओर भारत को फिर ताजा धमकी दी गयी है कि यदि भारत ने डोकलाम से सेनाएं न हटाईं तो दोनों देशों में जंग होकर रहेगी। इसे किसी सूरत में टाला नहीं जा सकता। चीन ने भारतीय पत्रकारों को अपने एक सैन्य केन्द्र का दौरा कराकर अपनी ताकत दिखाने का भी प्रयास किया मगर सच्चाई यह भी है कि चीन धमकियां चाहे जितनी भी दे, वह इस सच्चाई को जानता है कि भारत से जंग लडऩा उतना आसान नहीं और उसे भी इस जंग का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अंशुमान तिवारी का विश्लेषण।

चीन तमाम धमकियों के बावजूद युद्ध से हिचक रहा है इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। जंग की स्थिति में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चीन को महंगी कीमत चुकानी होगी। चीन भारत को हर साल करीब चार लाख करोड़ का निर्यात करता है और इस तरह भारत उसके लिए बड़ा बाजार है। जंग की सूरत में चीन को आर्थिक मोर्चे पर भी भारी झटका लगेगा। यही कारण है कि जानकारों का मानना है कि चीन धमकियां चाहे जितनी दे दे मगर वह जंग की स्थिति से अवश्य बचना चाहेगा। पिछले वर्ष भारत ने चीन से दूध, दूध से बने उत्पादों और कुछ मोबाइल फोन समेत कुछ अन्य उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

ये उत्पाद निम्नस्तरीय और सुरक्षा मानकों की कसौटी पर खरे नहीं पाए गए। भारत ने पिछले साल जनवरी में चीनी खिलौने के आयात पर प्रतिबंध लगाया था। दुनिया के कई अन्य देशों में भी चीन के घटिया उत्पादों पर प्रतिबंध लगना शुरू हो गया है। अमेरिका और यूरोप में भी चीन के उत्पादों की बिक्री घटी है। पिछली दीपावली में भारत में ही चीन के उत्पादों की बिक्री 60 प्रतिशत गिरी। अपने उत्पादों की गिरती बिक्री से चीन परेशान है। भारत में सोशल मीडिया में चीन के उत्पादों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चल रहा है। इस अभियान का भी चीनी सामानों की बिक्री पर भारी असर पड़ा है।

चीनी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर
चीन के सामान की जबर्दस्त बिक्री का कारण उनका सस्ता होना है। सस्ता होने की वजह से ही उनकी मांग ज्यादा है मगर अब इसका भी फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। मांग घटने से चीन अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो रही है। चीन अपने उत्पादों को सस्ता बनाने के लिए पहले ही मुद्रा का अवमूल्यन कर चुका है मगर ऐसा बार-बार ऐसा करना संभव नहीं है। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए चीन के कारोबारी पहले ही अपने उत्पादों की कीमत कम कर चुके हैं मगर मजदूरी बढऩे और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब और कटौती संभव नहीं दिखती। अपने उत्पादों के लिए संभावनाएं बनाए रखने के लिए भी चीन जंग से पीछे हट रहा है। उसे पता है कि जंग का उसके उत्पादों की बिक्री पर विश्वव्यापी दीर्घगामी असर पड़ेगा।