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ब्याज और कम करने से होगी आर्थिक वृद्धि दर तेज

Dainik Tribune 2017-08-11 22:46:49

अरविंद सुब्रमण्यन

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (एजेंसी)
संसद में शुक्रवार को पेश 2016-17 की दूसरी आर्थिक समीक्षा में चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस वित्त वर्ष की आधी छमाही में जीडीपी 6.75 से 7.5 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ेगी। समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर में और कमी किये जाने पर बल दिया गया ताकि आर्थिक वृद्धि को गति दी जा सके। आर्थिक समीक्षा में रुपये की विनिमय दर में तेजी, कृषि ऋण माफी तथा बैंकों और कंपनियों की बैलेंस शीट की समस्या, बिजली और दूरसंचार क्षेत्र में ऋण वसूली की बढ़ती चुनौती और जीएसटी लागू करने में शुरुआती दिक्कतों को वृद्धि दर के लिए चुनौती बताया गया है।
यह पहला अवसर है जब सरकार ने किसी वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट दो बार प्रस्तुत की है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के लिए पहला आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी 2017 को लोकसभा में रखा था क्योंकि इस बार आम बजट फरवरी के शुरू में ही पेश किया गया। आज प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में फरवरी के बाद अर्थव्यवस्था के सामने उत्पन्न नयी परिस्थितियों को रेखांकित किया गया है।  समीक्षा में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था अभी पूरी गति में नहीं आ सकी है जबकि इस पर एक के बाद एक विस्फीतिकारी प्रभाव पड़ते रहे हैं। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि ऋण माफी से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.7 प्रतिशत के बराबर आर्थिक मांग कम हो सकती है। समीक्षा में अनुमान है कि कृषि ऋण माफी योजनाओं पर राज्यों को कुल 2.7 लाख करोड़ रपये तक खर्च करना पड़ सकता है।