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अगर नहीं हुए सतर्क तो यहां भी किसी स्कूल से गूंजेंगी प्रद्युम्न जैसी चीख!

Patrika 2017-09-10 18:42:12

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के 7 साल के छात्र की हत्या की घटना ने देशवासियों का दिल दहला दिया है।

लखनऊ. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के 7 साल के छात्र की हत्या की घटना ने देशवासियों का दिल दहला दिया है। पूरे देश में इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है। इसके अलावा बस कंडक्टर और स्कूल के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग हर कोई कर रहा है। बच्चों की सुरक्षा के मामले में यूपी के स्कूलों के हालात भी हरियाणा जैसे हैं। अगर राजधानी लखनऊ की ही बात करें तो ज्यादातर निजी स्कूल अपना ट्रांसपोर्ट नहीं उपलब्ध करवाते हैं। निजी वैन चालक घर से बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं और स्कूल से उन्हें घर ले जाते हैं। ऐसे में खुदा न खास्ता अगर कोई घटना हो जाए तो स्कूल प्रशासन तुरंत पलड़ा झाड़ सकते हैं।

राजधानी लखनऊ में सीबीएसई व आईसीएसई के मिलाकर लगभग 250 स्कूल हैं। ज्यादातर स्कूलों के पास अपना ट्रांसपोर्ट नहीं है। निजी वाहनों से ही बच्चे आते- जाते हैं। ऐसे में घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचने के सफर में बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी भगवान भरोसे ही होती है। स्कूल प्रशासन ये कहकर पलड़ा झाड़ ले रहा है कि हम तो ट्रांसपोर्ट फैसलिटी उपलब्ध ही नहीं करवाते।

निजी चालकों के भरोसे मासूम

राजधानी लखनऊ के स्कूलों में ज्यादातर छोटे बच्चे वैन से आते हैं।आमतौर पर वैन चालक सेशन की शुरुआत में बच्चे के अभिभावक को अपने लाइसेंस,आईडी की फोटोकॉपी उपलब्ध करवाते हैं। लेकिन इन फोटोकॉपी की सत्यतता किसी सरकारी एजेंसी से जांचे जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसा भी अक्सर होता है कि आईडी देने वाला चालक अपनी जगह किसी और को बच्चों को लाने, ले जाने का जिम्मा दे देता है, जिसका कोई भी रेकॉर्ड अभिभावकों के पास नहीं होता है। एक दूसरे से पूछकर ही अभिभावक बच्चों को

कैसे लें जिम्मेदारी

लखनऊ पब्लिक स्कूल के प्रवक्ता विजय मिश्रा का कहना है स्कूल जब वैन फैसिलिटी ही नहीं देता तो उसकी जिम्मेदारी कैसे ले ले। अभिभावक निजी वैन से बच्चों को भेजते हैं तो ड्राइवर को स्कूल परिसर के अंदर आने देना ही पड़ेगा। वहीं माउंट फोर्ट इंटर कॉलेज के प्रवक्ता पीआर पांडेय ने बताया कि निजी वैन के ड्राइवर को परिसर में आने देने का नियम तो नहीं पर कई ड्राइवर लंबे समय से बच्चों को लाते व ले जाते हैं। ऐसे में उन्हें विश्वास के आधार पर अंदर आने दिया जाता है, लेकिन उनकी जिम्मेदारी हम नहीं लेते हैं। एलपीसी के प्रबंधक व शहर के सीबीएसई को-ऑर्डिनेट जावेद आलम खान का कहना है कि एलपीसी स्कूल का कोई ट्रांसपोर्ट नहीं है। ऐसे में जिम्मेदारी हमारी नहीं वैन सचालकों की गेट के अंदर तक एंट्री दी जाती है। हम बच्चों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हैं।

कई घटनाएं आईं सामने

प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, कई स्कूलों में हैं तो काम नहीं करते। कई जगह कैमरे काम भी करते हैं तो भी बच्चों के संग होने वाले अपराधा नहीं रुक रहे। हाल ही में राजधानी के दो स्कूलों की घटना सामने आई थी जहां बच्चे को टीचर ने बेरहमी से मारा था। इसके अलावा सेंट फेडलिस स्कूल की छात्रा के साथ छेड़ छाड़ की घटना भी सामने आई थी।

बता दें कि जुलाई 2016 में राजधानी के डीएम राजशेखर ने सभी स्कूलों की एंट्री, एग्जिट के अलग-अलग, स्कूल के अंदर आने वाले किसी भी शख्स को परिचयपत्र देना। सीसीटीवी कैमरे व गार्ड तैनात किए जाने थे। ज्यादातर स्कूलों ने कैमरे लगाकर, गार्ड तैनात तो किए पर बाकी सिफारिशें नहीं मानी।

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