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मुस्लिम महिला ने शौहर से लिया 'खुला', बोली- अब मैं आजाद

Eenadu India 2017-09-11 10:00:00

खुला लेने वाली महिला शहजदा।


लखनऊ। देश में एक साथ तीन तलाक के बारे में उच्चतम न्यायालय के हाल के ऐतिहासिक फैसले के बाद पैदा सूरतेहाल के बीच एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर अपने पति से ‘ख़ुला’ लेकर उससे अलग रहने का एलान कर दिया।


दरअसल, लखनऊ में ब्याही शाजदा खातून ने कल एक प्रेस कांफ्रेंस में अपने शौहर जुबेर अली को लिखे गये ख़ुला सम्बन्धी पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि उसने अपने पति से ‘ख़ुला’ लेने के लिये बहुत कोशिश की। इसके लिये वह दो बार इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवा और एक दफा फिरंगी महल भी गई, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली।

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लिहाजा, अब वह सार्वजनिक रूप से अपने शौहर को ख़ुला का नोटिस हस्ताक्षरित करके भेज रही है। कुरान और हदीस में इसे लेकर कोई रोक भी नहीं है, लिहाजा अब वह आजाद है। इस्लाम में शौहर को तलाक देने और महिला को ख़ुला लेने का अधिकार दिया गया है। ख़ुला लेने के बाद औरत अपनी मर्जी से रह सकती है।

यह कदम उठाने में खातून की मदद करने वाली ‘मुस्लिम वूमेन लीग’ की महासचिव नाइश हसन ने बताया कि वह महिला अपने शौहर के जुल्म से बहुत परेशान थी और वह पिछले 18 महीने से उससे अलग रहकर शिक्षण कार्य करके अपना गुजारा कर रही थी। तमाम अपील के बावजूद उसका पति ना तो उसे तलाक दे रहा था और ना ही ख़ुला।

उन्होंने बताया कि खातून अपना ख़ुला कराने के लिये दो बार नदवा और एक बार फिरंगी महल गई। वहां से उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि वह इस बारे में अपने शौहर की रजामंदी लेकर आए जबकि कुरान शरीफ में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिक तौर पर ख़ुला लेने के अलावा हमारे पास और कोई इलाज नहीं था। महिला की ‘इद्दत’ की अवधि नवम्बर में खत्म होगी। उसके बाद उसका ख़ुला मुकम्मल हो जाएगा।

‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि खातून ने ख़ुला लेने का जो तरीका अपनाया है, वह सही नहीं है। सिर्फ एक खत के आधार पर ख़ुला नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि ख़ुला की इच्छुक महिला को अपने शौहर को नोटिस देना होता है। अगर पति तीन नोटिस दिये जाने के बावजूद जवाब नहीं देता है तो ख़ुला अपने आप लागू हो जाएगा। मौलाना की इस दलील पर नाइश ने कहा कि अगर उन्हें खातून का कदम गलत लगता है तो अपने दावे को अदालत में साबित करें।

ऑल इण्डिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने खा़तून के कदम को बिल्कुल दुरुस्त करार देते हुए कहा कि जब शौहर और इस्लामी ओहदेदार लोग ख़ुला के लिये मदद नहीं करते तो महिला ‘निकाह फस्ख़’ का रास्ता अपना सकती है। ऐसी स्थिति में उसे ना तो काजी की और ना ही तलाक की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि ऑल इडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जारी किताब ‘मजमुअे-कवानीन इस्लामी’ में भी इस तरीके को जायज बताया गया है। शाइस्ता ने बताया कि कौम को रास्ता दिखाने के लिये जिम्मेदार मुस्लिम संगठनों ने महिलाओं के प्रति अपनी सोच अब तक नहीं बदली है। पित्रसत्तात्मक मानसिकता की वजह से महिलाओं की जिंदगी नरक बना दी गयी है।