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कभी 6 रुपए में पिता पूरे दिन करते थे काम, अब बेटा डेली कमाता है 34 करोड़ रुपए

The Hook 2017-09-12 00:00:00

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 Thehook desk : धीरूभाई अंबानी को अबतक का सबसे जीनियस बिजनेसमैन माना जाता है। इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड में अक्‍सर यह बात कही जाती है कि अगर बिजनेस करना है तो धीरूभाई से सीखें। बहुत कम लोगों को पता होगा कि धीरूभाई अंबानी नौकरी के लिए यमन गए थे जहां उनकी शुरूआती मंथली सैलरी 200 रुपए थी जो दिन के हिसाब से उनकी कमाई 6 रुपए के करीब होती थी। वहीं अब उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी आज डेली के हिसाब से करीब 34 करोड़ रुपए कमाते हैं।  धीरूभाई की पहली जॉब की बात करें तो 1949 में 17 वर्ष की उम्र में काबोटा नामक शिप से वे यमन के एडेन शहर पहुंचे थे। यहां उनके बड़े भाई रमणिकलाल ने उनके लिए सारी व्यवस्थाएं कर रखी थीं, इसलिए उन्हें वहां कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन धीरूभाई के मन में कुछ और ही चल रहा था। इसलिए 1954 में वे वतन वापस आ गए। सन् 1955 में किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए और यहीं से शुरू हुई उनकी व्यावसायिक यात्रा। यहां से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। धीरूभाई अंबानी सिर्फ 500 रुपए लेकर मुंबई आए थे। 6 जुलाई 2002 को जब उनकी मौत हुई तब तक रिलायंस 62 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव धीरूभाई अंबानी ने रखी थी। धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में हुआ था। इनका पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। धीरूभाई ने जब बिजनेस की दुनिया में कदम रखा तो न उनके पास न तो पुश्तैनी संपत्ति थी और न ही बैंक बैलेंस। उनके पिता हीराचंद एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। धीरूभाई के निधन के बाद उनकी संपत्ति बंटवारे में उनकी पत्नी कोकिलाबेन ने ही मुख्य भूमिका अदा की थी। आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी। उन्होंने बचपन में ही परिवार की आर्थिक मदद करनी शुरू कर दी थी। इस समय वे गिरनार (गुजरात का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल) के पास भजिए की दुकान लगाया करते थे, दुकान की आय यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पर सीमित थी।