newsdog Facebook

अगर इसके बाद भी सिर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान, तो समझो कुछ ग़लत है..

Khabar NonStop 2017-09-13 12:34:58

गुरुग्राम। गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई 7 साल के मासूम प्रद्युम्न की हत्या से पूरा देश स्तब्ध है। देशभर में जगह जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं तो अभिभावक कहीं ना कहीं सहम गए हैं। जिस तरह से स्कूल कैंपस में एक मासूम की हत्या कर दी गई, वह यकीनन हमारे समाज पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

इन्हीं सवालों से जूझते हुए जाने माने गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक कविता शेयर की है, जो कि काफी वायरल हो रही है। इस खबर में हम प्रसून जोशी की इस कविता की पंक्तियां शेयर कर रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आपको मार्मिक अनुभव होगा।

जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे,
जब मां की कोख से झांकती जिन्दगी,
बाहर आने से घबराने लगे,
समझो कुछ गलत है।

जब तलवारें, फूलों पर जोर आजमाने लगें,
जब मासूम आंखों में खौफ नजर आने लगे,
समझो कुछ गलत है।

जब ओस की बूंदों को हथेलियों पर नहीं,
हथियारों की नोंक पर थमना हो,
जब नन्हें-नन्हें तलुओ को आग से गुजरना हो,
समझो कुछ गलत है।


जब किलकारियाँ सहम जाएं,
जब तोतली बोलियाँ ख़ामोश हो जाएँ,
समझो कुछ ग़लत है।

कुछ नहीं बहुत कुछ ग़लत है,
क्योंकि ज़ोर से बारिश होनी चाहिये थी,
पूरी दुनिया में
हर जगह टपकने चाहिये थे आँसू,
रोना चाहिये था ऊपरवाले को,
आसमान से
फूट-फूट कर

शर्म से झुकनी चाहिये थीं इंसानी सभ्यता की गर्दनें,
शोक नहीं सोच का वक़्त है,
मातम नहीं सवालों का वक़्त है,
अगर इसके बाद भी सर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान
तो समझो कुछ ग़लत है…


बाप ने बेटे को 23 हजार में बेचा, वजह जानकर हैरान हो जायेंगे आप