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केवल न्याय की चाह ही मनुष्य को जानवरों से अलग करता है: कुलकर्णी

Pradesh Today 2017-09-13 22:25:00

मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर हुई संगोष्ठी   प्रदेश टुडे संवाददाता, होशंगाबाद  केवल न्याय की चाह ही ऐसा तथ्य है जो मनुष्य को जानवरों से अलग करता है। यह बात बुधवार को जिला न्यायालय के मीडिएशन सेंटर में राज्य मानवाधिकार आयोग स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसकेपी कुलकर्णी ने कहीं। उन्होंने कहा कि न्यायालय में अधिवक्तागण अपराधी की प्रतिरक्षा करते हैं। उस समय न्यायालय को उस पीड़ित व्यक्ति के विरुद्ध किए गए अपराध को भी दृष्टिगत रखना होता है। वह व्यक्ति जो न्यायालय में नहीं आता किंतु उसे यह विश्वास होता है कि न्यायालय से उसे न्याय मिलेगा, इसी न्याय की वांछा का अधिकार मानवाधिकार है। व्यक्ति हर चीज, हर घटना भूल सकता है किंतु स्वयं के साथ हुए अन्याय को कभी नहीं भूलता।  गोष्ठी में राज्य मानवाधिकार आयोग के जिला संयोजक एलएन शर्मा ने मनुष्य को प्राप्त विभिन्न अधिकारों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से व्यक्तियों के अधिकारों की पूर्ति के लिए कार्यरत है। इसके उपरांत यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लघंन होता है तो उसे मानवाधिकार आयोग में समुचित रूप से शिकायत करना चाहिए। व्यक्ति के मानवाधिकारों को न्यायालय के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने में व्यक्ति के मानवाधिकारों को न्यायालय के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने में विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्योंकि आर्थिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को विधि के समक्ष समानता के स्तर पर लाने में विधिक सेवा प्राधिकरण उसकी समुचित सहायता करता हैं। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि विभिन्न न्याय निर्णयों के माध्यम से उच्च न्ययालय एवं सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षित रखने का दायित्व अधिरोपित किया है। यदि राज्य में कोई व्यक्ति भूखा है तो राज्य का यह दायित्व है कि उसके लिए खाद्य की व्यवस्था कराई जाए। जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष प्रदीप चौबे ने बताया कि विधि के समक्ष सभी समान हैं और मानव होने के नाते उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए अधिकार आवश्यक हैं वे मानवाधिकार हैं।  संगोष्ठी में जिला न्यायाधीश के कुटुंब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश आरबी गुप्ता, विशेष न्यायाधीश यूके सोनकर, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश एके सिंह, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश निहारिका सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एसके चौबे, श्रम न्यायाधीश वैभव सक्सेना, न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र अतुलकर, दीप्ती ठाकुर औरं जिला संयोजक एलएन शर्मा, डॉ श्रुति मालवीय, हमेंद्र सिंह ठाकुर, मनोज यादव, राजेश मालवीय, अनुराग दीक्षित, विनोद तोमर, बृजेश शर्मा, आरएस यदव, मो जाहिद, अनूप तोमर, मनीष सराठे आदि अधिवक्तागण भी मौजूद थे।    CJM ने किया जेल का निरीक्षण  राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार सीजेएम एसके चौबे द्वारा जिला जेल खंड व का निरीक्षण किया गया। इस दौरान बंदियों को उनके अधिकारियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जेल चार दीवारी के अंदर निरूद्ध होने के बावजूद भी उनके कुछ अधिकार हैं। जैसे नि:शुल्क विधिक सहायता का अधिकार, अपील का अधिकारी, अपने प्रकरण में अपनी पसंद के अधिवक्ता के माध्यम से पैरवी कराने का अधिकार। जेल में निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह था कि जेल में भी व्यक्तियों के मानव अधिकार समुचित रूप से संरक्षित हों।