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अमित शाह के बेटे को दी जमीन का खुलासा करें मुख्यमंत्री : अजय सिंह

Patrika 2017-10-10 10:07:46

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे को रतलाम जिले में दी गई जमीन का खुलासा करने की मांग की


भोपाल। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को रतलाम जिले में पवन ऊर्जा चक्की लगाने के लिए दी गई जमीन के बारे में खुलासा करने की मांग की है। सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है, कि वे जय शाह की कंपनी द्वारा रतलाम में पवन ऊर्जा में 15 करोड़ निवेश करने के बारे में पूरी जानकारी दें। उन्होंने सवाल किया कि जिस कंपनी की पवन ऊर्जा में विशेषज्ञता ही नहीं है उसे रतलाम की बेशकीमती जमीन कैसे दे दी, क्या अमित शाह के डर से उनके बेटे को काम दिया?

 

इधर पहले से डरी हुई है प्रदेश सरकार

भोपाल। नौकरशाहों के तबादले को लेकर सरकार ने चुप्पी साध ली है। बार-बार पत्र व्यवहार के बाद सरकार ने यह तो बताया कि राज्य में तबादला बोर्ड गठित है, लेकिन बोर्ड का कार्रवाई विवरण उजागर करने से सरकार बच रही है।

केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय ने अपे्रल 2016 में मध्यप्रदेश सहित सभी राज्य सरकार को आदेश दिया था कि आईएएस अधिकारियों के तबादलों का कार्रवाई विवरण विभाग की बेवसाइट पर उजागर करना अनिवार्य है। आदेश का पालन एक जनवरी 2017 से किया जाना था, लेकिन 8 माह बाद भी इसका पालन नहीं हुआ है। आश्चर्य यह है कि राज्य में तबादला बोर्ड की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है, जबकि, नौकरशाहों के तबादले बोर्ड के माध्यम से ही होना है। बोर्ड की सिफारिश पर कांट-छांट या संशोधन का अधिकार मुख्यमंत्री को है, लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री को कारण बताना होगा। इसका उल्लेख कार्यवाही विवरण में होगा। मालूम हो तबादलों में राजनैतिक सिफारिशें भी होती है, इसमें मंत्री, विधायक, सांसद से लेकर राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।

डेडलाइन का भी पालन नहीं

आईएएस अधिकारियों के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने 20 अक्टूबर 2013 सरकार को निर्देश दिए थे कि अफसरों का कार्यकाल अधिकतम दो साल हो, लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हो रह है। स्थिति यह है कि छह-छह माह में अफसरों के तबादले हो रहे हैं। कुछ अफसरों के तबादले एक-एक और दो-दो दिन में भी हुए हैं।

तीन साल बाद मिली बोर्ड की जानकारी

लगातार तीन साल से आरटीआई के तहत राज्य में सिविल सर्विस बोर्ड की जानकारी मांगने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे कहते हैं कि उन्हें राज्य सरकार ने बोर्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय से जानकारी मांग गई तो केन्द्र ने जबाव दिया कि राज्य की ओर से बोर्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अब केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय ने बोर्ड की जानकारी उपलब्ध कराई है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2014 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बोर्ड में तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त एमएम उपाध्याय को सदस्य बनाया गया है। मालूम हो उपाध्याय अब रिटायर हो चुके हैं। दुबे सवाल करते हैं कि यदि बोर्ड का गठन पहले ही हो चुका था तो सरकार ने उस समय केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को जानकारी क्यों नहीं दी।

 

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