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जरूर जानें ! मेड इन इंडिया स्मार्टफोन्स के पीछे छुपा कड़वा सच

Techpanti 2017-10-10 15:45:34

दोस्तों तकरीबन डेढ़ साल पहले हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने मेक इन इंडिया का प्रस्ताव हम सबके सामने रखा था। इस नारे के तहत सुस्त अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और लाखों नौकरियों देना था खैर ये योजना तो अपने सही रास्ते जाता दिखाई दे रहा है। कई सारी मल्टीनेशनल कंपनियां अब अपना प्लांट भारत में खोल रही है।

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दोस्तों जब भी हम कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं और उसमें मेड इन इंडिया का टैग लगा देखते हैं तो हम अंदर से बहुत इमोशनल हो जाते है कि ये फ़ोन भारत मे बना है। लेकिन शायद ही कोई इसके पीछे छुपी असली सच्चाई को जानता है। तो आज हम टेकपंती आपको बताने जा रहे "मेड इन इंडिया" फ़ोन की असलियत ।

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इस पूरे मामले को समझने के लिए हमें सबसे पहले दो महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है। पहला मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) और दूसरा असेम्बलिंग (assembling) दोस्तों हमारा फोन कोई एक हिस्सा या पुर्जो से नहीं बना होता है बल्कि कई सारे पार्ट पुर्जे एक साथ मिल कर स्मार्टफोन को बनाते है। जिसमें मुख्य डिस्प्ले, बॉडी, प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी आदि शामिल है।

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अब मैन्युफैक्चरिंग का मतलब ये होता है कि यह सारे पार्ट्स को शुरुआत के ही स्टेज से निर्माण करना। और इसके लिए कंपनी को बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है। कई छोटे कंपनी प्लांट ना खोलकर सीधा उत्पादक से ही वो पार्ट्स खरीद लिया करती है। जैसे शाओमी , लेनेवो ये सब सैमसंग या फिर सोनी से ही खरीद कर कैमरा सेंसर इस्तेमाल करती है।

अब यहां सवाल ये उठता है कि हमारे फोन में वह कौन कौन सा पार्ट है जिसका उत्पादन भारत में ही हुआ है?

तो ऐसे में जो जवाब सामने आता है वह बहुत चौंकाने वाला है। हामरे फ़ोन में ऐसा कोई भी पार्ट्स नहीं है जिसका उत्पादन इंडिया में किया गया हो। असलियत में क्या होता है यह सारे पार्ट्स चाइना और जापान से बनकर आते हैं। और भारत में सिर्फ इसका असेंबलिंग होता है । याने की ढेर सारे पुर्जे को सही और सटीक जगह फिट कर दिया जाता है। और इसी तरह हमारा स्मार्टफोन बन कर तैयार हो जाता है। इसके लिए ना तो स्किल्ड लेबर की जरूरत पड़ती है ना ही कंपनियां को ज्यादा खर्चे करने पड़ते है। उदाहरण के तौर पर शाओमी कंपनी अपने फोन की असेंबलिंग आंध्र प्रदेश के एक गाँव मे स्तिथ वहीं के औरतों से करवाती है।

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दोस्तों हम भारीतय लोग ये सोचते है कि मेक इन इंडिया के कैंपेन के तहत सारी कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में खोल रही है और यहां फोन के हर पार्ट का निर्माण हो रहा है और यही पार्ट्स देश-विदेश में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इसके पीछे छिपा सच तो यही है कि 90 से 95 फीसद कंपोनेंट्स बाहर से बनकर आते हैं और भारत में सिर्फ इसको असेंबल किया जाता है। और भारत में कोई भी मैनुफैक्चरिंग प्लांट अभी तक मौजूद नहीं है और निकट भविष्य में हम लोग शायद इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैनुफैक्चरिंग प्लांट खोलने में कंपनियों को हजारों बिलियन डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। और उन्हें स्किल्ड और पके हुए कर्मचारी की जरूरत पड़ती है जिसकी शायद हमारे देश में वैसे संस्थान न होने के कारण कुछ कमी है।

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हालांकि कुछ ऐसे भी पार्ट्स है जैसे बैटरी , हेडफोन या फिर चार्जर जिसका निर्माण भारत में कुछ कंपनियां प्लांट खोल कर मुहैया करा रही है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि ज्यादातर महत्वपूर्ण पार्ट पुर्जे बाहर से ही उत्पाद किए जाते हैं। और रही बात भारतीय कंपनियों की जैसे माइक्रोमैक्स, ईन्टेक्स ,स्पाइस,लावा आदि की तो ये भी वही काम कर रही है, इनकी भी फ़ोन चाइना से बनकर आती है और यहां बॉडी कवर लगाकर हमलोगों को बेच दिया जाता है।

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तो दोस्तों सच अब आपके सामने है। अगली बार जब आप स्मार्ट फोन खरीदेंगे तो मेड इन इंडिया का टैग देख थोड़ा मायूस जरूर होंगे की भई ये फ़ोन भारत मे बना नही है सिर्फ असेम्बल किया गया है। लेकिन हमलोग उम्मीद करते है कि शायद सरकार ऐसा कड़ा कानून बनाये या फिर कुछ ऐसा स्कीम दे जिससे शायद कंपनी अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत मे भी खोल सके।

तो उम्मीद करता हूँ दोस्तों ये आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया होगा। इन सब मे आपकी क्या प्रतिक्रिया है वह नीचे हमसे जरूर साझा करें।

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