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बच्चेदानी के बाहर पेट में यहां पल रहा था भ्रूण, ऑपरेशन कर निकाला 4 माह का भ्रूण, बचाई महिला की जान

Patrika 2018-01-10 11:00:05

पेट में खून फैलने से महिला अचानक हुई बीमार, कॉलेज की टीम ने उठाया बड़ा जोखिम

चूरू

राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसरों ने बुधवार को एक बड़ा जोखिम उठाते हुए एक 20 वर्ष की गर्भवती महिला की जान बचा ली। महिला रतनगढ़ तहसील के गांव जालेऊ की थी, जिसके पेट में बच्चेदानी की जगह बाहर ट्यूब में भ्रूण पल रहा था। भ्रूण करीब 17 सप्ताह का हो चुका था। जोखिम बढऩे से महिला के पूरे पेट में खून फैल गया और महिला के दर्द शुरू हो गया। उसकी जान का खतरा बढ़ता जा रहा था लेकिन कॉलेज के प्रोफेसरों ने जोखिम उठाया और एक घंटे में सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली।


गायनोलॉजिस्ट सहायक प्रोफेसर डा. अनिता सहारण ने बताया कि मंगलवार रात को परिजन महिला को लेकर अस्पताल आए थे। उसे भर्ती कर लिया गया। महिला के पेट में तेज दर्द हो रहा था। 12 घंटे से पेशाब नहीं हो रही थी। लेकिन रात को ही नलकी लगाकर पेशाब खाली करवा दिया और दर्द निरोधक इंजेक्शन लगवा दिया गया फिर भी उसका दर्द कम नहीं हो रहा था। इसके बाद महिला की सोनीग्राफी करवाई गई। सोनोग्राफी रिपोर्ट से पता चला कि महिला की बच्चेदानी के बाहर ट्यूब में बच्चा पल रहा है। जिसे मेडिकल के अनुसार वाइवल प्रेगनेंसी कहा जाता है। प्रेगनेंसी करीब 17 सप्ताह की हो चुकी थी। इसके अलावा महिला के पेट में खून जमा होना बताया गया। अब तक महिला की तबियत काफी गंभीर हो चुकी थी। लेकिन कॉलेज के प्रोफेसरों ने महिला की जिंदगी के खतरे को देखते हुए परिजनों को सारी बात बताकर ऑपरेशन करवाने के लिए तैयार किया।

 

ट्यूब के अंदर बनी गांठ में था भ्रूण

 

सहायक प्रोफेसर सर्जन डा. जेपी चौधरी ने बताया कि पहले महिला के पेट में फैला करीब 2.5 लीटर खून निकाला गया। इसके बाद ट्यूब का ऑपरेशन किया गया। ट्यूब में करीब 20 सेमी गांठ थी जिसमें भ्रूण पल रहा था जो करीब सवा चार माह का था जिसका वजन करीब 200 ग्राम था। ऑपरेशन के तुरंत बाद ही भ्रूण (बच्चे) की मौत हो गई। लेकिन महिला की जान बचा ली गई। महिला अब बोल भी रही है। हालांकि उसे अभी विशेष निगरानी में रखा गया है।

 

इस टीम ने किया ऑपरेशन

 

प्रिंसिपल प्रो. वीरबहादुर सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी होने पर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गजेन्द्र सक्सेना के नेतृत्व में टीम बनाकर महिला का ऑपरेशन करने का निर्देश दिया। इसके तुरंत बाद महिला को मातृ एवं शिशु अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में लेकर ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। ऑपरेशन करीब एक घंटे तक चला। प्रो. सक्सेना ने बताया कि ऑपरेशन बहुत कठिन था इसमें महिला की जान भी जा सकती थी। रेफर करने के बाद उसकी स्थिति और गंभीर हो जाती। इसलिए यह निर्णय लिया गया। टीम में गायनोलॉजिस्ट डा. सुशीला नेहरा, एनेस्थीसिया डा. प्रमोद अग्रवाल, सहा. प्रो. दीपक चौधरी, सहा. प्रो. डा. आकांक्षा कस्वां, सहायक शिवलाल आदि
शामिल थे।

 

निजी सोनोग्राफी सेंटर पर होनी चाहिए कार्रवाई

 

महिला के ससुराल पक्ष के परिजनों ने बताया कि माहवारी नहीं आने पर कुछ माह बाद 22 दिसंबर को रतनगढ़ में निजी सोनोग्राफी सेंटर पर सोनोग्रोफी करवाई लेकिन संबंधित डॉक्टर ने कुछ नहीं बताया। यदि सोनोग्राफी डॉक्टर ने पहले बता दिया होता तो मरीज की यह स्थिति नहीं होती। किसी तरह मौत से जीती है। तीन साल पहले उसकी शादी हुई थी यह पहला बच्चा था। मंगलवार सुबह पांच बजे उसके अचानक दर्द होने लगा। इसके बाद रतनगढ़ उप जिला अस्पताल ले गए वहां डाक्टरों ने दवा देकर दर्द कम करने का प्रयास किया लेकिन न तो पेशाब हुई और न ही दर्द कम हुआ। इसके बाद रात करीब ११ बजे उसे चूरू के लिए रैफर कर दिया गया। इसके बाद वे उसे चूरू लेकर लेकर आए। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति से अवगत कराया।