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आवंटित भूमि से अतिक्रमण हटे तो हो स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण हो शुरु, नाराज ग्रामीणों ने एसडीएम को कार्रवई के लिए सौंपा ज्ञापन

Patrika 2018-01-11 10:03:35

आवंटित भूमि पर अतिक्रमण होने से निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।

 

उनियारा. पचाला पंचायत मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए आवंटित भूमि पर अतिक्रमण के चलते भवन निर्माण नहीं हो पाने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इस मामले में उपप्रधान नन्द किशोर साहू की अगुवाई में उपखण्ड अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि पचाला पंचायत मुख्यालय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्वीकृति जारी की गई थी।

 

 

भवन निर्माण के लिए जिला कलक्टर ने भूमि आंवटित कर पट्टा जारी कर दिया। यही नहीं सम्बन्धित भवन निर्माण कार्य के लिए टेण्डर प्रक्रिया एवं वर्क ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हंै, लेकिन आवंटित भूमि पर अतिक्रमण होने से निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।

 

 

इस दौरान काफी देर तक ग्रामीणों एवं एसडीओ के बीच वार्ता होने के बावजूद सीमाज्ञान कराने की तिथि तय नहीं हो पाई। इस पर ग्रामीण जिला मुख्यालय जिला कलक्टर से मिले तथा उन्हें उक्त स्थिति से अवगत कराया। इस पर जिला कलक्टर ने उपखण्ड अधिकारी को 2 दिन में भूमि से अतिक्रमण हटवा सीमाज्ञान कर ग्राम पंचायत को सुपुर्द कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।ज्ञापन सौपने वालों में राजाराम, हनुमान मीणा, दीपक, पप्पू गुर्जर, बुद्धिप्रकाश, गजानन्द, इकरामद्दीन आदि मौजूद थे।

 

 


अनुदान देने की मांग

टोंक. गोवंश के संरक्षण व सभी गोशालाओं को अनुदान देने की मांग को लेकर राजस्थान गोसेवा समिति व श्री गोधन संवर्धन गोशाला समिति पदाधिकारियों ने सरकार के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया कि सरकार ने 200 मवेशियों पर ही अनुदान देने का निर्णय किया है। ये भेदभावपूर्ण निर्णय है।

 

 

इसके साथ ही गो संवर्धन के लिए पृथक से गोपालन मंत्रालय की स्थापना करने, पंचगव्य पर केन्द्रित व्यवस्थाओं को लेकर महाविद्यालय की स्थापना, देशी नस्ल के संरक्षण, संवर्धन को लेकर नीति निर्धारण करने, वर्ष में नौ माह चारे के लिए अनुदान देने, गोचर भूमि का सीमांकन करने, गो-तस्करी को लेकर बने कानून की सख्ती से पालना कराने, गोवंश को राज्य धरोहर घोषित करने, सभी गोशालाओं के लिए भूमि आवंटन करने समेत अन्य मांगों के निराकरण की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में लक्ष्मीकान्त आकड़, ओमप्रकाश समेत अन्य पदाधिकारी शामिल थे।