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चंद्रहासिनी इस्पात इस तरह पहुंचा रही पर्यावरण को नुकसान

Patrika 2018-01-11 04:06:43

गेरवानी में आयोजित चंद्रहासिनी इस्पात के मामले में ग्रीन मैन रमेश अग्रवाल ने अपनी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि जनसुनवाई के नाम पर केवल रस्म निभाई

रायगढ़. गेरवानी में आयोजित चंद्रहासिनी इस्पात के मामले में ग्रीन मैन रमेश अग्रवाल ने अपनी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि जनसुनवाई के नाम पर केवल रस्म निभाई गई है। कंपनी ने अपना कार्य पहले ही आरंभ कर लिया है और बाद में जनसुनवाई की रस्म निभाई जा रही है।


रमेश अग्रवाल ने बताया कि जिले में पूर्व में भी 2010 में इस प्रकार की घटना हुई थी जिसमें एक कंपनी ने पहले काम आरंभ किया था और बाद में उसकी जनसुनवाई करवाई गई थी, ऐसे में इसकी शिकायत तात्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश से की गई थी,

बकायदा इस मामले को संज्ञान में लेते हुए मंत्री ने एक जांच टीम भेजी थी, इसके बाद संबंधित कंपनी का टीओआर निरस्त किया गया था और नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया था। अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कंपनी से अपने प्लांट का कार्य सात से आठ माह पहले ही आरंभ कर दिया है, इसके बाद जनसुनवाई आयोजित की गई। ये ईआईए नोटिफिकेशन का उल्लंघन है। इस मामले में पहले केस किया जाना चाहिए।


वेट एंड वॉच की स्थिति- विदित हो कि मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में आपत्ति करने पहुंचे लोगों ने बताया कि वहां पर कंपनी के कर्मचारियों और मजदूरों को भर-भर कर लाया गया था जिन्होंने समर्थन किया है। वहीं आपत्ति करने वाले लोगों का कहना है कि जिस प्रकार से ईआईए में गलत जानकारी दी गई है, उसका मजाक उड़ाया गया है इसके बाद भी यदि कंपनी को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलती है तो अंधेर नगरी वाली स्थिति होगी। इन हालात में इसे एनजीटी में चैलेंज किया जाएगा।


कहा 70 प्रतिशत लोग जाते हैं खुले में- एक ओर गेरवानी को लेकर ओडीएफ करने का ढोल पीटा जा रहा है दूसरी ओर गेरवानी में ही स्थापित उद्योग के जनसुनवाई में ओडीएफ की पोल खोली गई है। ईआईए रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इस क्षेत्र के 70 प्रतिशत लोगों के घरों में शौचालय नहीं है और वो खुले में शौच करने के लिए जाते हैं। रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि गांव में पर्याप्त निकास पद्धति नहीं हैखुले में शौच करना आम बात है कुछ जगहों पर निकास कच्ची नालियों के रूप में है।


संज्ञान में लिया जाएगा- हमारा कार्य लोगों की बात सुनना होता है, यदि कंपनी के ईआईए आदि पर आपत्ति आती है तो बकायदा इसे संज्ञान में लिया जाएगा, और ऊपरी कार्यालय को भेजा जाएगा।
-आरके शर्मा, पर्यावरण अधिकारी


70 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं- देखिए कंपनी किस आधार पर ऐसा कह रही है कि 70 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं है ये स्पष्ट नहीं है। हां कुछ लोग जाते होंगे ये मानव विहेवियर में शामिल है इस पर हमारा कार्य चल रहा है उन्हें समझाया जा रहा है। कंपनी की रिपोर्ट गलत है।
-चंदन त्रिपाठी, सीईओ, जिला पंचायत