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...तो मकर संक्रांति के साथ इस बार भी पकेगी 'सियासी खिचड़ी'!

Eenadu India 2018-01-12 20:13:00

डिजायन फोटो।


पटना। मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। सूरज के बदलते रुख के साथ बिहार की राजनीति भी कुछ न कुछ नया खेल दिखाती है। पिछले साल बिहार की राजनीति ने बड़ी करवट ली, सरकार बदली और बदल गये चेहरे।


इसकी शुरुआत की चर्चा शुरू हुई जब पिछले साल 14 जनवरी को ही सुशील मोदी ने कहा था, "इंतजार करिए, सूरज जब दक्षिण से उत्तरायन होगा, तो बिहार की राजनीति में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है" और वही हुआ। महागठबंधन टूटा और दो पुराने सहयोगी साथ आ गए। पिछली बार खिचड़ी में किचकिच और संशय था इस बार खिचड़ी टेंशन फ्री।
 
अब तक मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही पार्टी से रौशन रहने वाला 10 सर्कुलर रोड इस बार सूना-सूना रहेगा। लालू यादव जेल में हैं और खुद लालू भी मकर संक्रांति के बाद बेल के लिए प्रयास करने वाले हैं। यानि उन्हें भी सूरज के उत्तरायन होने का इंतजार है।

पटना में पिछले कई सालों से मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन कर रहे बिहार जदयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के भोज में इस बार जाहिर तौर पर चेहरे बदल जाएंगे।

वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि सभी को निमंत्रण भेजा जा रहा है। लेकिन पुराने सहयोगियों को निमंत्रण की बात वे टाल गए।

अपने अंदरुनी खटपट से परेशान बिहार कांग्रेस में काफी समय से चूड़ा-दही भोज की परंपरा नहीं रही है। और वैसे भी इस बार कांग्रेस संक्रांति के बाद होने वाली आमंत्रण यात्रा की तैयारी में व्यस्त है।

इस बार सबका ध्यान बीजेपी के भोज पर है जिसमें एनडीए नेताओं की एकजुटता दिखाने पर जोर रहेगा। बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद नाराज चल रहे मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा का रुख देखने लायक होगा। बीजेपी एमएलसी सत्येन्द्र कुशवाहा के निधन के कारण पार्टी ने अपना भोज का कार्यक्रम रद्द कर दिया है।

हालांकि हर साल की तरह बीजेपी एमएलसी रजनीश कुमार के घर आयोजित होने वाले चूड़ा-दही भोज में पार्टी के सभी नेता शामिल होंगे।

इधर, इस साल पहली बार लोजपा भी पटना स्थित पार्टी कार्यालय में चूड़ा-दही भोज देने की तैयारी कर रही है। कुल मिलाकर कहें तो मकर संक्रांति के साथ इस बार फिर नई सियासी खिचड़ी पकेगी। भोज होगा और कौन जाने, इस भोज से फिर नए सियासी समीकरण उभरें।

क्योंकि इतिहास गवाह है कि बिहार की सियासत में भोज के जरिए राजनीति की दिशा और दशा तय होती रही है।