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हे भगवान, ये इलाज हो रहा है या फिर तकलीफ दे रहे

Patrika 2018-03-11 11:22:50

एक पलंग पर तीन मरीजों को चढ़ा रहे बॉटल, संक्रमण का खतरा, इलाज कराने भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रही परेशानी, एक हजार तक पहुंचा ओपीडी का आंकड़ा।

सीहोर. हे भगवान ये इलाज हो रहा या फिर तकलीफ दी जा रही है... ये शब्द जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के हैं। यहां बदइंतजामी थमने का नाम नहीं ले रही है। अलग-अलग बीमारी से ग्रस्त दो, तीन मरीजों को एक पलंग पर लेटाकर बॉटल चढ़ाई जा रही है। मरीज ऐसा नहीं करने से मना कर रहे है, लेकिन कोई सुनने तैयार नहीं है। इससे उनको तकलीफ हो रहीतो संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

मौसम में आए बदलाव के बाद कई बीमारियों ने मरीजों को घेर लिया है। बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द सहित अन्य बीमारी का इलाज कराने वह जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। डॉक्टर चेक करने के बाद भर्ती होने का पर्चा बना रहे हैं। पर्चे को लेकर वार्ड में पैर रखते ही नजारा देख अचंभित हो रहे हैं। जिन पलंग पर उनको भर्ती होना था, उनके ऊपर पहले ही दो, तीन मरीज का इलाज हो रहा है। शनिवार को अस्पताल में यह हाल थे कि सुबह के समय अचानक संख्या बढऩे से एक पलंग पर चार मरीज को बॉटल लगाई गई। ऐसे में समझा जा सकता है कि उनको कितनी दिक्कत उठाना पड़ी होगी।

करवट भी नहीं ले सकते मरीज
पलंग पर भर्ती मरीज करवट भी नहीं ले पा रहे थे। दर्द से कराहते हुए यही इंतजार कर रहे थे कि उनके साइड वाले का इलाज कब पूरा हो और वह उठकर जाए। घंटों देर इसी इंतजार में उनको पीड़ा भोगना पड़ी। एक पलंग पर दो मरीजों का इलाज करने का काम पिछले कई दिन से चल रहा है। डॉक्टर को मरीज और परिजन एक पलंग पर एक मरीज का ही बॉटल लगाने की बात कह रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने को तैयार नहीं है।

परिजन में आक्रोश
प्रबंधन की लापरवाही से मरीजों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। फरड़ कोठरी से अपनी भांजी का इलाज कराने आए मुन्ना ने बताया कि जब पलंग की कमी है तो प्रबंधन को व्यवस्था करना चाहिए। आखिर मरीज की जान के साथ क्यों खिलवाड़ किया जा रहा है। वह पहले ही बीमारी के चलते दर्द से कराह रहा है, ऊपर से उसको तकलीफ दी जा रही है। ऐसे तो मरीजों में संक्रमण फैलकर अन्य बीमारी की चपेट में आ जाएंगे। मुन्ना का यह तक आरोप है कि बॉटल लगाने के बाद डॉक्टर मरीज को समय पर देखने तक नहीं आते हैं।

जरूरत पांच सौ की, मौजूद दो सौ
अस्पताल के कायाकल्प के नाम पर भले ही ८ करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए हो, लेकिन सुविधा का अभाव आज भी बना हुआ है। पांच सौ बेड की जगह पर सिर्फ वर्तमान में दो सौ बेड ही हैं। जबकि जिले भर से मरीज यहां आते हैं। प्रबंधन जरूर कह रहा है कि डिमांड बनाकर भेजी है। उसके बाद भी बेड नहीं आए हैं। यह कब आएंगे और मरीजों की समस्या कब दूर होगी इसके बारे में कोई बताने तैयार नहीं है।

01 से 10 मार्च की ओपीडी
1 मार्च- 899
2 मार्च- 411
3 मार्च- ६९४
4 मार्च- ५३८
5 मार्च- १२९८
6 मार्च- ३९५
7 मार्च- १२३१
8 मार्च- १०३४
9 मार्च- 1113
10 मार्च- ७५४
नोट- ओपीडी संख्या अस्पताल के अनुसार है।

परेशानी
अस्पताल में कल से इलाज कराने भर्ती हैं। एक पलंग पर तीन चार मरीजों को बाटल लगाकर इलाज किया जा रहा है। इससे परेशानी हो रही है।
- रामकुंवर बाई, मरीज धामनखेड़ा

इंतजाम नहीं है
इतना बड़ा अस्पताल होने के बाद भी पर्याप्त सुविधा के इंतजाम नहीं है। इलाज की आस में आई थी, लेकिन यहां आकर दिक्कत दोगुना हो गई।
- याशबीन बी, बद्री महल सीहोर

चार का इलाज किया
सुबह के समय चार मरीज को एक ही पलंग पर बॉटल लगाकर इलाज किया गया। दो मरीज का तो कई दिन से एक पलंग पर ही इलाज हो रहा है।
- शांता बाई, मरीज इंदिरा नगर सीहोर

प्रयास कर रहे
अभी ज्यादा संख्या में मरीज आ रहे हैं। पलंग कम होने से मजबूरी में इलाज करना पड़ता है। किसी मरीज को वापस तो नहीं कर सकते। फिर भी पूरा प्रयास है कि परेशानी न हो।
- एए कुरैशी, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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