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हादिया व शफीन जहां की विवाह को सुप्रीम न्यायालय ने रखा बरकरार

Poorvanchal Media 2018-03-11 14:23:30

हादिया व शफीन जहां की विवाह को सुप्रीम न्यायालय ने बरकरार रखा है. दोनों की विवाह पूरे राष्ट्र में चर्चा में रही तो शफीन से यह सवाल पूछना बनता था कि उन्होंने हादिया से विवाह क्यों की? इस पर बीबीसी हिंदी से शफीन ने कहा, “हम दोनों इंडियन पैदा हुए हैं व हमें खुशी से साथ रहने की स्वतंत्रता है. हम जिसके साथ चाहें उसके साथ रहने का हमारे पास अधिकार है. मैं उन्हें पसंद करता था तो हमने विवाह कर ली.
अखिला अशोकन ने अपना धर्म बदलाव करने के बाद शफीन से विवाह कर ली थी व उन्होंने अपना नाम हादिया रख लिया था. इसको लेकर टकराव प्रारम्भ होने के बाद शफीन ने पहली बार खुलकर बात की है.

‘इंसाफ मिलने से खुशी हुई’

अभी तक हादिया मजबूती से एक युवा महिला की तरह अपनी बात रखती आई हैं. यहां तक कि सुप्रीम न्यायालय की पीठ ने सीधा उनका बयान जानने के लिए उन्हें समन जारी किया था. शुक्रवार को सर्वोच्च कोर्ट ने बोला था कि केरल न्यायालय को दोनों लोगों की विवाह को रद्द नहीं करना चाहिए था. इससे पहले कोर्ट ने सवाल उठाया था कि न्यायालय के पास दो बालिग लोगों के बीच सहमति से हुई विवाह को रद्द करने का अधिकार कहां से है. हादिया ने बीबीसी हिंदी से कहा, “मुझे इंसाफ मिलने से बहुत खुशी हुई है. मुझे जो न्यायालय से नहीं मिला था वो सुप्रीम न्यायालय से मिला है.”

इस मामले ने तूल तब पकड़ा था जब हादिया के पिता केएम अशोकन को यह एहसास हुआ कि उनकी बेटी ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया है. इसके बाद अशोकन ने केरल न्यायालय में हैबियस कॉरपस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की याचिका दायर की थी. हादिया ने न्यायालय में बोला कि इस्लाम से बहुत ज्यादा प्रभावित होने के बाद उन्होंने इस धर्म को स्वीकार कर लिया था. हादिया कहती हैं, “मेरी विवाह को लेकर इतना बवाल इसलिए मचा क्योंकि मैंने इस्लाम कबूल किया. क्या लोगों को इस्लाम कबूल करने का हक नहीं है?”

कहां से हुई शुरुआत?

हादिया के पिता के। एम। अशोकन का कहना था कि उनकी बेटी के दोस्त के पिता अबूबकर के असर में आने के बाद उनका जबरन धर्म बदलाव किया गया. अशोकन की पुलिस में शिकायत के बाद अबूबकर को अरैस्ट कर लिया गया था व इसके बाद हादिया गायब हो गईं. यह तब हुआ था जब पहली हैबियस कॉरपस याचिका दायर की गई थी. अशोकन ने बाद में दूसरी याचिका दायर की व संभावना जताई कि उनकी बेटी को राष्ट्र से बाहर ले जाया जाएगा.

इसके बाद शफीन ने हादिया के साथ विवाह कर ली थी व वह याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय में भी मौजूद रहती थी. लेकिन एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने न्यायालय से बोला कि ऐसे बहुत से तथ्य हैं जो दिखाते हैं चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट से संपर्क वाले अतिवादी संगठन हिंदू लड़िकयों का इस्लाम में धर्म बदलाव करने में शामिल हैं. इसके परिणामस्वरूप यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया गया.

एनआईए की जांच शफीन के कथित आतंकवादी संपर्कों पर केंद्रित थी. शफीन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य थे व रोजगार के लिए मस्कट, ओमान भी गए थे. हालांकि, सुप्रीम न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि एनआईए की जांच जारी रहेगी.
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फिलहाल साथ नहीं रहेंगे दोनों
पीएफआई का किया शुक्रिया

सुप्रीम न्यायालय के निर्णय के बाद शफीन तकरीबन 500 किलोमीटर का सफर तय करके अपनी बीवी हादिया को लेने कोल्लम (केरल) से सलेम (तमिलनाडु) गए जहां वह एक होम्योपैथी कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं. इसके बाद वह कोल्लम में अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने से पहले 500 किलोमीटर दूर कोझिकोड गए.

बहुत ज्यादा थक चुका यह शादीशुदा जोड़ा कोझिकोड में पीएफआई के चेयरमैन ई अबूबकर से मिलने संगठन के यूनिटी हाउस मुख्यालय गया था. शफीन ने कहा, “यह सिर्फ पीएफआई की वजह से हुआ है क्योंकि उसने हमेशा हमारी मदद की.” हादिया ने पीएफआई के परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला कि उन्होंने दो व दूसरे संगठनों से मदद के लिए संपर्क किया था लेकिन केवल पीएफआई ही उनके बचाव के लिए आया.

एक पत्रकार ने उनसे उनके ऊपर लगे गंभीर आरोपों से जुड़ा सवाल किया तो हादिया ने कहा, “हर कोई आरोप लगा सकता है. अगर शफीन नहीं होते तो मेरे साथ कौन खड़ा होता? बहुत से ऐसे लोग हैं व बहुत से ऐसे मुस्लिम संगठन हैं जिनका नाम मैं नहीं लेना चाहती, वे मेरी मदद नहीं करना चाहते थे.” वह कहती हैं, “ऐसे कुछ संगठन भी थे जो मेरी मदद कर रहे संगठनों के कार्य के रास्ते में आए.”

अभी साथ नहीं रहेंगे दोनों

लेकिन सुप्रीम न्यायालय से पति-पत्नी ठहरा दिए जाने के बाद भी यह दोनों अभी भविष्य में साथ रह पाएंगे ऐसा नहीं है. शफीन कहते हैं, “कॉलेज ने इन्हें (हादिया को) सिर्फ तीन दिन की छुट्टी दी है. इसके बाद यह कॉलेज चली जाएंगी.” उन्होंने आगे कहा, “वह अपनी पढ़ाई कर रही हैं व इसके बाद हम आम लोगों की तरह साथ ज़िंदगी बिता पाएंगे.”

वह कहते हैं कि वह प्रशासकीय सचिव के तौर पर मस्कट में कार्य करते थे लेकिन इस केस के कारण उनकी जॉब चली गई व अब वह केरल में रहते हैं. शफीन कहते हैं कि करियर के लिए उन्हें अब थोड़े समय की आवश्यकता है क्योंकि वह कानूनी लड़ाई से बहुत ज्यादा थके हुए हैं. एनआईए की जांच में योगदान के सवाल पर शफीन कहते हैं, “उन्होंने मुझे जहां बुलाया है, मैं वहां गया हूं.”