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गोरखपुर में वोट प्रतिशत घटने से क्या होगा बीजेपी को नुकसान ….????

gorakhpur times 2018-03-12 09:53:06

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव खत्म हो गया लेकिन वोट प्रतिशत कम होने के चलते बीजेपी के लिए कई सवाल छोड़ गया. गठबंधन के नए दौर में समाज शास्त्री दोनों उपचुनाव को रोचक देख रहे हैं. कम हुआ वोट प्रतिशत भी कुछ और इशारा कर रहा हैं. बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी गोरखपुर और फूलपुर में मतदान का प्रतिशत पिछले बार के मुकाबले कम रहा. राजनीतिक गलियारे में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं. आखिरकार सारी कोशिशों के बाद भी लोग वोट देने घरों से क्यों नहीं निकले. 1989-90 में पहली बार गोरखपुर सीट गोरक्षपीठ के पास गयी और उसके बाद से लगातार ये सीट मठ के पास ही रही.

जीत का अंतराल भी लगातार बढ़ता रहा. लंबे अर्से के बाद गोरक्षपीठ के बाहर ये सीट गई. नया राजनीतिक माहौल बना, समाजशास्त्री कहते हैं कि फिर भी मठ का असर दिखेगा, लेकिन अंतर्विरोध का फर्क भी पड़ेगा. दूसरी तरफ पहली बार फूलपुर जीते बीजेपी के लिए मतप्रतिशत ने और संकट खड़ा कर दिया. चालीस प्रतिशत भी मतदान नहीं हुआ. सबकी निगाहें प्रतिष्ठी की सीट बनी फूलपुर पर अटक गईं, क्योंकि ये वीवीआईपी सीट भी डिप्टी सीएम केशव मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई थी. लगातार केशव मौर्य फूलपुर में कैंप किए हुए थे.

समाजशास्त्री कहते हैं कि सामाजिक समीकरण फूलपुर के पक्ष में नहीं हैं. दोनों सीटों पर जीत का अंतराल तीन लाख से अधिक का था. वोट प्रतिशत कम होने के चलते बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर है. मना जाता है कि उपचुनाव सत्तापक्ष का होता है. क्या बीजेपी दोनों सीटों पर जीत दोहरा पाएगी और अगर जीतती है तो जीत का अंतर कायम रख पाएगी.