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RBI की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, भारतीय नोटबंदी के बाद यहां लगा रहे हैं अपना पैसा

The Desi Awaz 2018-03-13 03:44:10

RBI की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, भारतीय नोटबंदी के बाद यहां लगा रहे हैं अपना पैसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के जरिए करंसी के इस्तेमाल को बेहद कम करना चाहते थे। लेकिन मौजूदा हालात को देखकर ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है। दरअसल इस बात का खुलासा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में हुआ है। दरअसल रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2017-18 का दूसरा क्वार्टर आते ही लोग एक बार फिर से करेंसी को ही ज्यादा यूज़ करने लगे हैं। यानी कि सीधा-सीधा कहा जाए तो लोगों की पहली पसंद है कि करेंसी को अपने पास ही रखना। रिपोर्ट में बताया गया है कि करंसी होल्डिंग साल 2017-18 के दूसरे क्वार्टर में 11.1 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। वही करेंसी होल्डिंग नोटबंदी के समय साल 2016-17 के तीसरे क्वार्टर में 21.7 फीसदी के नेगेटिव रेट पर गई पहुंच गई थी।

वही आरबीआई की रिपोर्ट को देखें। तो उसके अनुसार साल 2017-18 की पहली तिमाही में करेंसी होल्डिंग का ये पैटर्न वापस अपने पहले वाले लेवल पर ही आ चुका है। यानी कि आपसे सीधा-सीधा कहा जाए तो नोटबंदी से पहले जो करेंसी होल्डिंग का लेवल था। अब वही लेवल दोबारा आ चुका है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार साल 2017-18 के दूसरे क्वार्टर में जीडीपी में बैंक डिपाजिट की हिस्सेदारी करीब 5.9 फीसदी के लेवल पर जा पहुंची है। तो वहीं पेंशन फंड की हिस्सेदारी भी बढ़कर अब 0.6 फ़ीसदी पहुंच गई है। तो वहीं म्यूचल फंड की हिस्सेदारी भी अब 1.4 फ़ीसदी पर जा पहुंची है। वही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है। कि नोटबंदी के बाद जो बैंकों से कर्ज की डिमांड घट गई थी वह भी अब नॉर्मल लेवल पर आ चुकी है। साल 2017-18 की दूसरी तिमाही में ग्रोथ फाइनेंसियल लायबिलिटी 5.3 फीसदी पर जा पहुंची है। और यह साल 2016-17 की तीसरी तिमाही में 4.8 फ़ीसदी के नेगेटिव लेवल पर थी।

वह रिपोर्ट में यह भी बताया गया है। कि इन्वेस्टमेंट के लिए अब भी हर भारतीय की पहली पसंद बैंक ही हैं। और आपको बता दें कि कमर्शियल बैंक और कॉपरेटिव बैंक की कुल हिस्सेदारी करीब 50 फ़ीसदी है। इस सब के बाद हर भारतीय लाइफ इंश्योरेंस फंड, म्यूच्यूअल फंड, प्रोविडेंट फंड और करेंसी में अपना पैसा लगा रहे हैं। यह तो शायद आपको पता ही होगा। कि 8 नवंबर 2016 को केंद्र की मोदी सरकार ने पूरे देश में 500 और 1000 के नोट को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार का कहना था कि इससे सिस्टम में ब्लैक मनी पर लगाम जरुर लगेगी। और साथ ही भारत में कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में भी बढ़ोतरी होगी।

वही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें। तो उसके अनुसार नोटबंदी लागू हो जाने के बाद से हाउसहोल्ड कि नेट फाइनेंसियल एसेट 7.3 फ़ीसदी के नेगेटिव लेवल पर जा पहुंची थी। यह साल 2016-17 के चौथे क्वार्टर से पॉजिटिव जोन में आनी शुरू हो गई। आरबीआई की रिपोर्ट के लेटेस्ट आंकड़ों को देखें। तो उसके हिसाब से साल 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीडीपी के 8.3 फीसदी के पॉजिटिव लेवल पर आ चुकी है।

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