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Expert View: जानिए... आखिर क्यों नहीं लग पा रही रेप जैसे अपराध पर लगाम?

Eenadu India 2018-03-13 22:00:00
नई दिल्ली "जब पढ़े लिखे लोगों को निमोनिया हो सकता है, तो क्या पढ़े लिखे लोगों को मानसिक रोग नहीं हो सकता? जी हां, बिल्कुल हो सकता है लेकिन लोग उसका इलाज नहीं कराना चाहते है।" यह कहना है जानी-मानी साइकॉलजिस्ट अरुणा ब्रूटा का। आखिर ऐसा क्यों जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

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नई दिल्ली "जब पढ़े लिखे लोगों को निमोनिया हो सकता है, तो क्या पढ़े लिखे लोगों को मानसिक रोग नहीं हो सकता? जी हां, बिल्कुल हो सकता है लेकिन लोग उसका इलाज नहीं कराना चाहते है।" यह कहना है जानी-मानी साइकॉलजिस्ट अरुणा ब्रूटा का। आखिर ऐसा क्यों जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...


अरुणा ब्रूटा कहती हैं कि जो व्यक्ति रेप जैसी वारदात को अंजाम देता है वह मानसिक रोगी है। जिसका इलाज होना बहुत जरूरी है, यदि इलाज नहीं हुआ तो वह ऐसे वारदातों को अंजाम देते रहेंगे। ब्रूटा ने कहा कि हर बीमारी के इलाज को लेकर लोग डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, लेकिन मानसिक रोग एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज कोई नहीं कराना चाहता है। उन्होंने कहा यदि किसी को यह बोल दो कि तुम्हें एक साइकोलॉजिस्ट की जरूरत है, तो उधर से रिएक्शन बहुत ही नेगेटिव आता है।

अरुणा ने कहा कि मानसिक रोग भी कई प्रकार के होते हैं जैसे कि एग्रेशन, मेनिया, एजिटेटेड डिप्रेशन आदि। उन्होंने बताया कि यदि किसी से कह दो कि तुम्हें मानसिक रोग है तो उसकी तरफ से यही प्रतिक्रिया आएगी कि क्या तुम पागल हो? इस रोग के लिए लोग अपने हाथ में चार अंगूठी पहन लेंगे, झाड़-फूंक करवा देंगे, पूजा करवा लेंगे, दान करवा देंगे लेकिन किसी मनोचिकित्सक के पास नहीं जाएंगे। सही इलाज ना मिलने की वजह से लगातार ऐसी खबरें सुनने में आती ही रहती हैं।

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साइकोलॉजिस्ट अरुणा ने कहती है कि यही नहीं ऐसे और भी कई कारण है जिसकी वजह से रेप जैसी घटना बढ़ रही है। लेकिन कोई भी इसे लेकर गंभीरता से कार्य करता नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इसका एक और बेहतर इलाज है, और वह यह है कि मीडिया के माध्यम से इस विषय पर लगातार चर्चा होनी चाहिए।



 

अरुणा कहती है कि आजकल न्यूज चैनलों पर तमाम दूसरे विषयों पर घंटों बहस होती रहती है, लेकिन इस बड़े मुद्दे पर किसी का भी ध्यान नहीं। जब तक इस गंभीर विषय को लेकर हर एक माध्यम से चर्चा नहीं होती, तब तक लोगों की मानसिकता बदलना आसान नहीं है। यही वजह है कि इस तरह के जघन्य अपराध को अनपढ़ और पढ़ें लिखे सभी अंजाम देते जा रहे हैं।

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अरुणा आगे कहती है कि रेप जैसे अपराध को रोकने के लिए तमाम योजनाएं भी लाई जा रही हैं, लेकिन वह केवल एक कदम और एक नजरिया है, जससे हम शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन उससे पूरा समाधान नहीं निकल सकता है। उन्होंने कहां कि जब तक इस विषय पर अच्छे ऐड नहीं बनते, अच्छी फिल्में और सिरियल्स नहीं बनती, अच्छी बहस नहीं होती, तब तक ठोस समाधान निकालना संभव नहीं है।