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चीन-पाक से कैसे निपटेंगे! सेना के 68% हथियार पुराने

Hindustan Samay 2018-03-14 11:11:31

बजट को भी नाकाफी बताया
स्‍थायी समिति ने वर्ष 2018-19 के दौरान गवर्नमेंट द्वारा सेना को आवंटित बजट की जांच की। इस दौरान बजट को नाकाफी पाया। समिति के मुताबिक सेना को आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. जबकि आपातस्थिति के लिए खरीद समेत पहले से चल रही 125 स्‍कीमों की आवश्यकता भी इससे पूरी नहीं होगी। समिति ने आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपये के आवंटन को भी नाकाफी बताया। साथ ही टिप्‍पणी की कि यह तो पहले से चिह्नित 29,033 करोड़ रुपये के खर्च को भी पूरा नहीं करता। इसलिए सेना अपने आधुनिकीकरण के लिए कुछ भी नहीं कर सकती।

8% ही बेहतरीन श्रेणी के हथियार
समिति के मुताबिक इंडियन सेना के पास महज 8% हथियार ही स्‍टेट ऑफ आर्ट या बेहतरीन श्रेणी के हैं। वहीं कुल मिलाकर सेना के पास 24% हथियार आधुनिक हैं। यही 24% साजोसामान मौजूदा समय में इस्‍तेमाल के लायक है। लेकिन यह आंकड़ा नाकाफी है। क्‍योंकि मौजूदा समय में किसी भी सेना के लिए आदर्श स्थिति यह है कि उसके पास औसतन एक तिहाई साजोसामान विंटेज श्रेणी, एक तिहाई मौजूदा आवश्यकता के मुताबिक, एक तिहाई साजोसामान आधुनिक व एक तिहाई स्‍टेट ऑफ आर्ट श्रेणी का साजोसामान हो।

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पाक-चीन से जंग के खतरे पर जताई चिंता
संसदीय समिति के सामने सेना ने बोला कि राष्ट्र को दो मोर्चे पर खतरा है। पाक व चाइना अपनी-अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण का काम तेजी से कर रहे हैं। साथ ही चाइना हिंदुस्तान से लगी सीमा के आसपास गैरकानूनी निर्माण कर रहा है। इनमें सड़कें व अन्‍य निर्माण शामिल हैं। लेकिन इंडियन सेना के पास अपने मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए भी बजट नहीं है। सेना ने पठानकोट व कश्मीर में आतंकवादी शिविर पर हमले, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की बढ़ती फायरिंग व डोकाला में चाइना के आक्रामक रुख का जिक्र करते हुए बोला कि उसे संसाधनों की अधिक आवश्यकता है।

14% बजट ही आधुनिकीकरण के लिए उपलब्‍ध
समिति ने सेना को आवंटित बजट को बेहद कम बताते हुए बोला कि सेना को मिला सिर्फ 14% बजट ही आधुनिकीकरण के लिए उपलब्ध है। दूसरी ओर 63% वेतन देने में खर्च होता है। 20% सामान्य रखरखाव पर खर्च होता है। जबकि 3% ढांचागत सेवाएं स्थापित करने पर खर्च होता है। समिति ने रिपोर्ट में प्रस्‍ताव दिया है कि सेना के आधुनिकीकरण का बजट कुल बजट का 22-25% के बीच ही होना चाहिए।

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भारत संसार का सबसे बड़ा हथियार खरीदार
सोमवार को स्‍टॉकहोम के थिंकटैंक इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि है। राष्ट्र की रक्षा जरूरतों को पूरा करने व सेना को मजबूत करने के लिए हिंदुस्तानने 2013-17 के बीच विश्‍व में खरीदे जाने वाले हथियारों में सर्वाधिक 12% हथियार खरीदे। 2008-12 व 2013-17 दौरान हिंदुस्तान का हथियार आयात 24% बढ़ा है। हिंदुस्तान को हथियार सप्‍लाई करने वाले राष्ट्रों में पहला स्‍थान रूस का है। रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान ने हथियार खरीदने में पिछले 10 वर्ष में करीब 100 अरब डॉलर खर्च किए हैं।

चीन 5वें व पाकिस्‍तान 9वें स्‍थान पर
संसार के अलग-अलग राष्ट्रों से हथियार खरीदने के मामले में हिंदुस्तान के बाद दूसरे स्‍थान पर सऊदी अरब है। तीसरे व चौथे स्‍थान पर क्रमश: मिस्र व संयुक्‍त अरब अमीरात है। हिंदुस्तान के साथ सीमा टकराव को बढ़ावा देने वाला चाइना इस सूची में पांचवें स्‍थान पर है। छठे व सातवें स्‍थान पर क्रमश: ऑस्‍ट्रेलिया व अल्जीरिया हैं। आठवें स्‍थान पर इराक है। हिंदुस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्‍तान इस सूची में 9वें स्‍थान पर है।