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कभी 23 साल ही जिन्दा रहने की बात थी लेकिन जिए 76 साल, ऐसे महान वैज्ञानिक को सलाम

BAT BALL 2018-03-14 11:41:22


नमस्कार पाठको, जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारे चैनल पर क्रिकेट से जुडी हुई खबरें प्रकाशित की जाती हैं लेकिन आज एक बहुत बड़ी खबर आ रही है जिससे हम आपको रूबरू करवाएंगे।

आज पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी दुखदायी खबर आई है। वो यह है कि मशहूर वैज्ञानिक प्रो. स्टीफन हॉकिंग अपने विज्ञान को दिए महान योगदानों को हमारे बीच अपने प्रतिबिम्बों के रूप में छोड़कर हमसे सदा के लिए अलविदा कह गए हैं। आज के बाद उनके योगदान ही उनकी पूर्ति का काम करेंगे।

9 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड (ब्रिटेन) में फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग के घर जन्मे हॉकिंग 76 साल की उम्र में हमसे दूर चले गए हैं। उनकी मौत की खबर यूके मिडिया में उनके परिवार के प्रवक्ता के हवाले से दी गई और बताया गया कि उनकी मृत्यु घर पर ही हुई।

अपने साक्षात्कारों में अक्सर प्रो. हॉकिंग बताया करते थे कि उनकी विज्ञान जगत में सफलता का राज उनकी बीमारी है। बीमारी से पहले वह अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रहेंगे तो उन्होंने अपना सारा ध्यान रिसर्च पर लगा दिया।

दरअसल 1963 में हॉकिंग को मोटर न्यूरॉन बीमारी हो गयी थी और तब उनके सिर्फ 2 साल जीने की बात कही गई थी। उस समय वे महज 21 साल के थे। लेकिन बीमारी के कारण वे पढाई की और अधिक उन्मुख हुए और अपनी जिंदगी में उन आयामों को छू लिया जो हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस प्रकार जिनके लिए 23 वर्ष ही आयु बताई जा रही थी वो सबके प्रेरणा स्त्रोत बनते हुए 76 साल जीवित रहे और इन सालों में विज्ञान जगत को कई योगदान दिए।


हॉकिंग द्वारा प्रमुख रूप से ब्लैक होल और रिलेटिविटी (सापेक्षता) के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान दिया गया। उनकी किताब 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' दुनियाभर में काफी चर्चित रही थी।