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झारखंड में नहीं बना विपक्ष का तालमेल!

nayaindia.com 2018-04-14 13:36:00

झारखंड में कांग्रेस पार्टी ने वहीं किया, जो उसने उत्तर प्रदेश में किया था। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पिछले दिनों हुए स्थानीय निकाय चुनावों में लड़ गई। उसने समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल नहीं किया और उस समय तक बसपा से तालमेल की बात भी नहीं शुरू हुई थी। सो, नतीजे यह हुआ कि ज्यादातर जगहों पर भाजपा जीत गई। बिल्कुल वहीं कहानी झारखंड में दोहराई जा रही है। वहां चल रहे शहरी निकायों को चुनाव में सभी विपक्षी पार्टियां अलग अलग लड़ रही है। 

सोलह अप्रैल को होने वाले चुनाव में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लगभग हर जगह उम्मीदवार उतारे हैं। उसके साथ गठबंधन का ऐलान कर चुकी कांग्रेस ने भी सभी जगहों पर उम्मीदवार दिए हैं। विपक्ष की तीसरी पार्टी, जिसके महागठबंधन में रहने की संभावना है वह बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा है। इसने भी ज्यादातर शहरी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। 

माना जा रहा है कि कांग्रेस, जेएमएम और जेवीएम इन तीनों के अलग अलग चुनाव लड़ने का फायदा भाजपा को मिल रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की स्थिति पहले अच्छी नहीं थी। केंद्र और राज्य सरकार भाजपा की है और इसके अलावा स्थानीय निकायों में भी पहले से ज्यादातर जगहों पर भाजपा ही है। इसलिए तीन तरह की एंटी इंक्बैंसी के कारण भाजपा मुश्किल में थी। 
विपक्ष के बिखराव के कारण भाजपा की स्थिति सुधरी है। हालांकि अब भी भाजपा से जुड़े लोग बता रहे हैं कि उनके नाराज कार्यकर्ता हो सकता है कि वोट देने न निकलें या नोटा को वोट करें। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के कोर शहरी वोटरों में उदासीनता दिखी थी, तभी राजधानी रांची की सबसे सुरक्षित सीट पर भाजपा उम्मीदवार को अपेक्षाकृत कम वोट मिले थे। भाजपा के शहरी समर्थकों की उदासीनता और नगर निगम के प्रति लोगों की नाराजगी की वजह से रांची शहर में जेएमएम की उम्मीदवार वर्षा गाड़ी भाजपा की आशा लाकड़ा को कड़ी टक्कर दी है। और इसी वजह से रांची शहर में डिप्टी मेयर के कांग्रेस के उम्मीदवार की भी संभावना अच्छी मानी जा रही है।