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उत्पाती बंदरों से जल्द मिलेगी निजात, मथुरा से आई टीम ने निकाला ये समाधान

Eenadu India 2018-04-14 17:05:00

कॉन्सेप्ट इमेज।


शिमला। राजधानी शिमला में उत्पाती बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू हो गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से आई तीन विशेषज्ञों की टीम जाखू वॉर्ड में डेरा डाले हुए है। विभागीय अभियान के तहत शहरी क्षेत्रो से करीब 600 बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य तय गया है।


बता दें बंदरों को पकड़ने के बाद उन्हें टूटीकंडी स्थित ट्रॉमा सेंटर में नसबंदी के लिए भेजा जा रहा है। जहां बंदरों की नसबंदी करने के बाद उन्हें टैग लगाकर दोबारा पकड़े गए क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा ताकि शहर में बंदरों की संख्या पर अंकुश लगाया जा सके और लोगों व पयर्टकों को इनके उत्पाद से निजात मिल सके। बंदरों की नसबंदी के लिए प्रति बंदर 700 रुपये की पेमेंट की जाएगी।

गौर हो कि विधानसभा में बजट स्तर में बंदरों की समस्या को लेकर चर्चा की गई थी। जिसमें बंदरों की संख्या का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण करवाने पर बंदरों की अनुमानित संख्या 207614 पाई गई है। वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा था कि प्रदेश सरकार किसानों बागवानों की फसलों को बदरों द्वारा किए जा रहे नुकसान से निजात दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर और जागरुक है।

बता दें प्रदेश में बंदरों की आबादी का प्रबंधन प्रदेश में बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के  लिए साल 2007 से बंदर नसबंदी कार्यक्रम शुरू किया  गया है। वर्तमान में प्रदेश में 8 बन्दर नसबन्दी केंद्र  टूटीकंडी   सस्तर (हमीरपुर), गोपालपुर (कांगड़ा), बौल (ऊना), सरोल (चम्बा), सलापर (मण्डी), पांवटा (सिरमौर) व ईसपुर (ऊना) कार्यरत हैं। इन केंद्रों में चार मार्च 2018 तक  139989 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी हैं।

वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में साल 2004 में बंदरों की  पहली बार गणना करने पर उनकी संख्या 317512 अनुमानित की गई थी। साल 2015 में फिर से की गई गणना में बंदरों की संख्या 207614 अनुमानित की गई। वन मंत्री ने कहा कि इस नसबंदी कार्यक्रम के परिणाम आगामी कुछ  सालों में पूरी तरह प्राप्त होंगे।

बंदरों की नसबंदी को लेकर डीएफओ शहरी इंद्र कुमार का कहना है कि वन विभाग के तय अभियान के तहत से बंदरो की नसबंदी का कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। बंदरों को पकड़ कर टूटीकंडी स्थित ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया है।