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मिलीभगत से केरोसीन वितरण में गड़बड़झाला

The Punchline Expose 2018-04-14 19:08:34

मिलीभगत से केरोसीन वितरण में गड़बड़झाला

पॉश कॉलोनी में भी गरीब उपभोक्ताओं की भांति केरोसीन वितरण का दावा
शहर में 2.49 लाख राशनकार्डों की तुलना में है 3.75 लाख गैस कनेक्शन
जोधपुर। शहर में इन दिनों केरोसीन वितरण में गड़बड़झाला चल रहा है। यहां 2.49 लाख राशनकार्डों की तुलना में 3.75 लाख गैस कनेक्शन है। इसके साथ ही रसद विभाग द्वारा पॉश इलाकों में भी केरोसीन वितरण का दावा किया जा रहा है जबकि पॉश इलाके में रहने वाले लोगों ने वर्षों से केरोसीन नहीं लिया है। रसद विभाग व राशन विक्रेताओं की मिलीभगत से इस केरोसीन की कालाबाजारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक गत माह मार्च का आवंटित केरोसीन राशन की आधी दुकानों पर ही पहुंचा जबकि आधी दुकानों के पास कोई खास उपभोक्ता नहीं होने से होलसेलर के जरिए डीलर्स ने सीधा बाजार में केरोसीन बेच दिया।
बाजार में डामर इंडस्ट्री सहित अन्य उद्योगों में केरोसीन का उपयोग होता है। गरीबों को 17.50 रुपए प्रति लीटर मिलने वाला केरोसीन बाजार में 40 से 45 रुपए प्रति लीटर बेचा जाता है यानि हर महीने करीब 25 लाख रुपए के केरोसीन का कोई हिसाब-किताब नहीं है। हाल ही में रसद विभाग ने शहर में राशन की दुकानों पर केरोसीन के ड्रम की संख्या दो से घटाकर एक कर दी थी लेकिन विभाग के अधिकारी इस बात की जांच नहीं कर
रहे है कि आखिर केरोसीन कौन से उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।
इसलिए संदेह के घेरे में
केरोसीन का वितरण इसलिए संदेह के घेरे में है क्योंकि शहर में शहर में राशन की करीब 270 दुकानें है। पहले सभी राशन डीलर्स को दो ड्रम यानि 440 लीटर केरोसीन आवंटित किया जा रहा था। इस आवंटन पर सवाल उठाने के बाद राशन डीलर्स का कोटा आधा यानि 220 लीटर कर दिया गया। रसद विभाग को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि किस क्षेत्र में कितने उपभोक्ता केरोसीन के हकदार है। वह सभी डीलर्स को समान रुप से केरोसीन का वितरण कर अपने कत्र्तव्य की इतिश्री कर रहा है। रसद विभाग मानकर चल रहा है कि शहर की पॉश कॉलोनी में भी केरोसीन के उतने ही उपभोक्ता है जितने सांसी व नट कॉलोनी में।
ऐसे होती है कालाबाजारी
जोधपुर शहर में वर्तमान में खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 68 हजार परिवार है। इन 68 हजार परिवारों को केवल गेहूं मिलता है वो भी पोस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के जरिये। सरकार ने पोस मशीन में एक खामी यह छोड़ दी है कि इसमें एक अंगूठे के जरिये चार आइटम की एंट्री हो सकती है, बस यहीं से केरोसीन की कालाबाजारी होती है। गेहंू लेने वाला उपभोक्ता अंगूठा लगाकर अपना गेहूं ले लेता है, पीछे से राशन डीलर्स उसी के खाते में केरोसीन की भी एंट्री दिखाकर उसे बाजार में बेच देता है। शहर के अधिकांश राशन डीलर्स यही कर रहे है और उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी भी नहीं है।
यह है फैक्ट फाइल
जोधपुर में जिले में 7.05 लाख परिवार है जिनमें 6.47 लाख गैस कनेक्शन और 9.27 लाख राशनकार्ड है। अकेले जोधपुर शहर में 2.49 लाख राशन कार्ड बने हुए है। वहीं इन राशन कार्डों पर 3.75 लाख गैस कनेक्शन ले रखे है। इसमें बीस हजार राशन कार्ड बीपीएल परिवार के है।