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मिसाइल हमला: क्या सीरिया बनेगा दूसरा इराक?

Dainik Pukar 2018-04-15 00:00:00

वॉशिंगटन. सीरिया में हुए कथित रासायनिक हमले का बदला लेने के लिए अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने सीरिया पर मिसाइलें दाग दीं. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, ‘मिशन अकम्प्लीश्ड’. हालांकि, अब राष्ट्रपति के इस ट्वीट की तुलना पूर्व प्रेजिडेंट जॉर्ज डब्लू बुश के उस बयान से हो रही है, जो उन्होंने इराक पर हमला करने के बाद दिया था. आलोचकों ने अब यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि असल में ट्रंप का सीरिया में मिशन क्या है?

ट्रंप ने अब तक यही कहा था कि सीरिया में उनका लक्ष्य आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का सफाया करना है. इसके बाद अमेरिकी सेना वहां से हटा दी जाएगी. लेकिन सीरिया पर मिसाइलें दागने के बाद अपने भाषण में जो ट्रंप ने कहा, वह ज्यादा उलझन भरा है. दरअसल, ट्रंप ने सीरियाई सरकार द्वारा रासायनिक हमलों को रोकने के लिए एक स्थायी अभियान चलाने का वादा किया.

इस वादे के बाद ट्रंप भी अपने से पहले के राष्ट्रपतियों की श्रेणी में आ गए हैं. एक्सपर्ट्स की माने तो अमेरिकी नीति एक बार फिर साल 2003 जैसी हो गई है, जब अमेरिका ने इराक पर रासायनिक हथियार होने का आरोप लगाते हुए हमला कर दिया था. बुश के कार्यकाल में डेप्युटी नैशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर रहे ओ, सलिवन ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इन हमलों से यूएस की नीति जाहिर होती है. इन हमलों के बाद यह सवाल उठते हैं कि सीरिया में कितने दिनों तक अमेरिकी सेना रहेगी और वॉशिंगटन का वास्तविक उद्देश्य क्या है.’