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ग्यारह साल बाद पूरी हो सकी बुंदेलखंड की यह पेयजल परियोजना

Patrika 2018-04-15 18:00:55

पेयजल संकट से जूझ रहे बुन्देलखण्ड में पानी की तरह पैसा बहाया गया।

चित्रकूट. बुन्देलखण्ड की सबसे बड़ी और नासूर बन चुकी पेयजल समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई योजनाओं-परियोजनाओं का क्या हाल है, यह किसी से छिपा नहीं। न जाने कितनी परियोजनाएं कागजों में चलती रहीं और हकीकत में उनके नाम पर एक भी ईंट नहीं रखी गई। दूसरी ओर कई परियोजनाएं अपनी पूर्णावधि से आगे निकलते हुए अभी भी घिसटते हुए संचालित हो रही हैं और जनता को लाभ देने वाले उसमें भी दलाली का नमक मिर्च लगाकर फायदे का चटखारा ले रहे हैं। चित्रकूट में ऐसी ही दो परियोजनाएं बसपा शासनकाल में शुरू हुई थीं, जिनके माध्यम से अब जाकर थोडा बहुत पानी ग्रामीणों को मिल रहा है। दीगर बात यह है कि भविष्य में ये परियोजनाएं समुचित व् सुचारू रूप से संचालित होंगी या नहीं या इस पर संशय बरक़रार है क्योंकि सत्ता और सिस्टम का कोई भरोसा नहीं कि कब किस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।

बसपा शासनकाल में हुई थी परियोजना की शुरुआत

पेयजल संकट से जूझ रहे बुन्देलखण्ड में पानी की तरह पैसा बहाया गया। इस समस्या से निपटने के लिए लेकिन ठेकेदारों और विभागों की मिलीभगत से कई परियोजनाओं ने धरातल पर दम तोड़ दिया जबकि कागजों पर वे संचालित होती रहीं। कई परियोजनाओं को बार-बार बुखार चढ़ता रहा और गिरते पड़ते किसी तरह खानापूर्ति के नाम पर उन्हें पूरा किया गया। चित्रकूट की मऊ व् बरगढ़ पेयजल परियोजना दरअसल बसपा शासनकाल के दौरान सन् 2010 में शुरू हुई थी। तत्कालीन मुख्यमन्त्री मायावती ने जनपद के मऊ व् आदिवासी बाहुल्य बरगढ़ क्षेत्र के ग्राम समूहों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए इन योजनाओं की शुरुआत की थी। इन इलाकों के किनारे से निकली यमुना नदी से पानी को लिफ्ट कराकर शुद्ध पेयजल आपूर्ति शुरू करने की परियोजना को मंजूरी दी गई थी, जिसकी कुल लागत लगभग 250 करोङ रूपये रखी गई थी।

सीएम योगी ने परियोजना में तेजी लाने के दिए थे निर्देश

परियोजना की मंजूरी मिलने के बाद शुरूआती दिनों में काम तेजी से शुरू हुआ और ऐसा लगा की अगले दो वर्षों के दौरान यह परियोजना पूरी भी हो जाएगी और इसकी निर्धारित अवधि भी इतनी ही थी। शुरूआती दिनों में काम में तेजी आने के बाद कुछ ही महीनों में रफ़्तार कम होने लगी और फिर सन् 2012 में सपा सरकार बनने के बाद उम्मीद जगी कि पुनः परियोजना को पंख लगेंगे। उम्मीद के विपरीत बजट न मिलने और अन्य अव्यवस्थाओं से परियोजना किसी तरह घिसटते हुए अपने पूरा होने की बाट जोहती रही। सपा सरकार में इस परियोजना को पूरा करने की बात होती रही लेकिन धरातल पर कुछ खास न हो सका। काम तो नहीं रुका और कार्य चलता रहा लेकिन साल 2012 से 17 तक भी इस परियोजना से पानी न मिल सका। साल 2017 में निजाम बदलने पर सीएम योगी ने अपने पहले दौरे 22 अक्टूबर 2017 के दौरान पेयजल संकट से निपटने के लिए चलाई जा रही परियोजनाओं का जिक्र करते हुए काम में तेजी लाने का निर्देश दिया।

कई गाँव के लोगों को मिलेगा लाभ

निजाम को दिखाने के लिए ही सही, मऊ बरगढ़ पेयजल परियोजना फ़िलहाल चालू हो गई और आस-पास के कुछ ग्रामीण इलाकों में कनेक्शन के माध्यम से ग्रामीणों को पानी के दर्शन होने लगे। गुरुवार 12 अप्रैल को सीएम योगी द्वारा समीक्षा बैठक में पेयजल संकट को लेकर डीएम को खुद निगरानी करने की हिदायत देने के बाद डीएम विशाख जी अय्यर ने क्षेत्र का दौरा करते हुए पेयजल आपूर्ति की हकीकत जानी जिस पर पानी की सप्लाई चालू मिली। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पानी के लिए कनेक्शन निः शुल्क दिए जा रहे हैं और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दलाली न होने पाए। इस पेयजल परियोजना के माध्यम से मऊ व् बरगढ़ ग्राम पंचायत के हजारों ग्रामीण लाभान्वित होंगे। लगभग एक सैकड़ा से अधिक गांवों को पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। कनेक्शन देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एसडीएम मऊ राममूर्ति त्रिपाठी ने कहा कि कनेक्शन निः शुल्क दिए जा रहे हैं।

( चित्रकूट से विवेक मिश्रा का इनपुट )

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