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भारत के प्रदर्शन में बेटियों और हरियाणा का दमखम

Janta Se Rishta 2018-04-17 15:10:53


जनता से रिश्ता वेबडेस्क आस्ट्रेलियां के गोल्ड कोस्ट में संपन्न हुए 21 वें राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन से भारतीय खिलाडिय़ों ने एशियाई खेलों और टोक्यों ओलंपिक के लिए नई उम्मीदें जगायी हैं। भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य पदकों के साथ अपना सफर पूरा किया और आस्ट्रेलिया तथा इंग्लैंड के बाद पदक तालिका में तीसरा स्थान हासिल करने में कामयाब रहा। भारत का प्रदर्शन पिछली बार ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में काफी अच्छा रहा, जहां भारत को 15 स्वर्ण समेत 64 पदक मिले थे। हालांकि वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से अभी भी काफी पीछे है। भारतीय खिलाडिय़ों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में सामने आया था, जब भारत ने 38 स्वर्ण सहित 101 पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया था। दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2002 के मेनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में देखने को मिला था, जब भारत को 30 स्वर्ण समेत 69 पदक मिले थे। गोल्ड कोस्ट में भले ही हमारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सामने नहीं आया लेकिन कड़ी प्रतिद्वंदिता के दौर में भारतीय एथलीटों ने उम्मीद से बढ़कर खेल दिखाया। हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स की हैसियत ओलंपिक, विश्वकप और एशियाई खेलों से नीचे है लेकिन 71 देशों के इस जमावड़े में आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, न्यूजीलैण्ड और कनाडा जैसी खेल शक्तियां शामिल थीं। आस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड इस बार पहले दो स्थान पर रहे लेकिन 218 सदस्यों के भारतीय दल ने अनेक खेलों में अपने झंडे गाड़े। कुश्ती, निशानेबाजी, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों में भारतीय एथलीट छाये रहे। एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक स्पर्धा में पदक जीता बल्कि इस स्पर्धा में उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पांच एथलीटों में शुमार कर लिया। कुश्ती में कुल बारह पहलवान इन खेलों में उतरे थे और सभी ने पदक जीते। इनमें से सुशील कुमार और सुमित ने तो बड़ी आसानी से गोल्ड मेडल जीते। वेटलिफ्टिंग में मणिपुर की मीराबाई चानू और बनारस के एक गांव की पूनम यादव ने जिस तरह अपने वजन वर्गों में नये रिकार्ड के साथ स्वर्ण जीते उससे एशियाई एवं ओलंपिक खेलों के लिए उनका दावा पुख्ता हुआ है। निशानेबाजी भी अब भारत की ताकत बनता जा रहा है। 16 साल की मनु भाकर और 15 साल के अनस भानवाला इन खेलों के जरिये विश्व स्तरीय निशानेबाज के रूप में स्थापित हो गये जबकि हिना सिद्दू ने स्वर्ण एवं रजत दोनों पदक के साथ अपने झंडे गाडऩे में सफल रही। टेबल टेनिस में 22 साल की मणिका बत्रा नये सितारे के रूप में उभरी है। जहां तक बैडमिंटन का सवाल है, भारत की दो बेटियों सायना नेहवाल और पीवी सिंधू देश को बैडमिंटन की महाशक्ति बना चुके हैं। महिलाओं के सिंगल्स में गोल्ड मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच हुआ। पुरूष बैडमिंटन में भी किदाम्बी श्रीकांत हालांकि रजत पदक ही हासिल कर पाये लेकिन वे राष्ट्रमंडल खेलों में अपने प्रभावी प्रदर्शन की बदौलत वल्र्ड नंबर वन बनने में सफल रहे हैं। इन खेलों में यदि किसी ने निराश किया तो वह भारत पुरूष एवं महिला हॉकी टीमें हैं, जो कड़े संघर्ष के बाद सेमीफायनल मुकाबले तक तो पहुंची पर अपना अभियान इससे आगे नहीं ले जा सकी और कोई पदक हासिल नहीं कर सकी।
भारत के लिहाज से गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि देश के लिए लगभग आधे पदक बेटियों ने जीते। 26 गोल्ड में से 12 महिलाओं ने जीते, जबकि 20 रजत में से 11 और 20 कांस्य में से सात उनके हिस्से में आये। एक और खास बात यह रही कि भारत के कुल 66 पदकों में से 22 पदक अकेले हरियाणा राज्य के खिलाडिय़ों ने जीते। 26 गोल्ड में नौ गोल्ड हरियाणा के एथलीटों के हिस्से में आये। इससे यह संदेश साफ तौर पर मिलता है कि यदि सरकार या कोई राज्य खेलों को अपनी प्राथमिकता में रखे, तो उत्कृष्ट नतीजे मिल सकते हैं। जब हरियाणा जैसा छोटा राज्य ऐसे नतीजे ला सकता है तो दूसरे राज्य क्यों नहीं ला सकते। दूसरा संदेश यह है कि देश की नारी शक्ति खेलों के मैदान में पुरूषों से कदम से कदम मिला सकती हैं। यह साबित हो चुका है कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत बस उन्हें प्रेरित करने और बेहतर प्रशिक्षण की है। अच्छी बात यह है कि भारत में क्रिकेट से इतर भी खेलों के प्रति रूझान बढ़ा है और इसका बड़ा श्रेय टीवी चैनलों और विभिन्न खेलों में शुरू हुई इनामी लीग स्पर्धाओं को जाता है। हमारी युवा पीढ़ी विभिन्न खेलों में अपने खिलाडिय़ों के प्रदर्शन से प्रेरणा ले रही है और जिस तरह तमाम खेल कैरियर बनाने के साधन बन रहे हैं, उससे निश्चित रूप से खेलों के प्रति तेजी से रूझान बढ़ रहा है। केंद्र सरकार और साई ने एशियाई खेलों और ओलंपिक के लिए ऊंचे लक्ष्य रखे हैं और युवा प्रतिभाओं के दम पर हम उम्मीद कर सकते हैं कि इन मंचों पर भी भारत का गौरव बढ़ेगा।

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