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सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है फ्लेवर हुक्का, हो सकती है ये गंभीर बीमारियां

Khabarnwi 2018-08-07 20:00:00

एक अध्ययन में कहा गया है कि दिल की सेहत के लिए हुक्‍का भी सिगरेट जितना ही नुकसानदेह है। काफी लोगों को लगता है कि इसमें लगे पानी के पाइप की वजह से यह जल्दी से जलने वाले तंबाकू से सुरक्षित है। हुक्का किशोरों और युवाओं में काफी लोकप्रिय है। यूनीवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए अध्ययन में कहा गया है कि हुक्का में इस्तेमाल होने वाला हशिश में भी वही हानिकारक चीजें होती हैं, जो सिगरेट के तंबाकू में होती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हुक्का पीने वालों की धमनियां सख्त होने लगती हैं, जिससे हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हुक्का में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू शीशा में भी वहीं कार्सिनोजेनिक होते हैं, तो सिगरेट के तंबाकू में होते हैं। यूसीएलए के शोधकर्ताओं ने कहा कि हुक्का पीने वालों में छोटी अवधि में दिल की बीमारी होने की उतनी ही आशंका होती है, जितनी धूम्रपान करने वालों को होती है। बीते कुछ दशकों से तंबाकू कंपनियों ने मानना शुरू किया है कि तंबाकू सेहत के लिए हानिकारक होती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हशिश में भी सिगरेट की तरह ही तंबाकू की मात्रा होती है। इसी तरह इसमें निकोटीन भी होती है और इसके धुंए में भी कार्बन मोनोऑक्साइड भी सिगरेट की तरह ही होता है।

तंबाकू में फल और कैंडी जैसे कई फ्लेवर

हुक्का किशोरों और युवाओं में काफी लोकप्रिय है। तकरीबन 10 फीसदी किशोर हुक्का पीने के शौकीन हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि हुक्का में इस्तेमाल की जाने वाली तंबाकू में फल और कैंडी जैसे कई फ्लेवर होते हैं। प्रमुख शोधकर्ता मैरी रेजाक हाना का कहना है कि इसी वजह से यह युवाओं में काफी लोकप्रिय है।

दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में वीकेंड आते ही युवाओं के चेहरे खिल उठते हैं। असल में वीकेंड आते ही पब और हुक्का बार गुलज़ार जो हो उठते हैं। कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर ऑफिस जाने वालों तक सभी हुक्के के धुएं से घिरे हुए नज़र आते हैं। हुक्का पीना आज एक ‘ट्रेंड’ बन चुका है। इसमें इस्तेमाल होना वाले तम्बाकू को शहद या गुड का फ्लेवर दिया जाता है, जिससे हुक्के का स्वाद मीठा हो जाता है। माना जाता है कि हुक्के के लोकप्रिय होने का यही एक कारण है। आमतौर पर तमाम लोग मानते हैं कि हुक्का स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं होता, जबकि सच तो यह है कि हुक्के का एक कश सिगरेट पीने से भी ज्यादा घातक होता है।

हुक्का का इतिहास

आमतौर पर हुक्का एक वॉटर पाइप होता है, जिसे फ्लेवर्ड तंबाकू को पीने के लिए बनाया जाता है। हुक्के को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है जैसे-शीशा, हबल-बबल, गोज़ा आदि। ऐसा माना जाता है कि हुक्के की शुरुआत सदियों पहले भारत में ही हुई। उसके बाद हुक्का दुनियाभर में घूमते-घूमते इतना मशहूर हो गया कि इसका सेवन करना कई जगहों पर प्रतिष्ठा का प्रतीक समझा जाने लगा। ख़ासकर मध्य पूर्व के देश जैसे मिस्र, ईरान, इराक़, तुर्की आदि में इसका सेवन तेजी से बढ़ता देखा गया।

सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक नही है हुक्का

हुक्के का सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक होने के मिथक के चलते इसका चलन अमेरिका, यूरोप और रूस में भी फैल गया। धीरे-धीरे इसका चलन भारत में भी हो गया है। भारत की बात की जाये तो आज भी बड़े-बूढ़े गांव में हुक्का पीते दिखाई देते हैं, पर धीरे-धीरे शहरों में भी इसका चलन बढ़ने लगा है। आलम यह है कि इसके लिए आजकल हुक्का सेंटर तक बनने लगे हैं। युवाओं और महिलाओं तक में हुक्का पीने की आदत में इज़ाफा देखा जा रहा है।

हुक्का पीना सिगरेट पीने की तरह ही स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, कई बार तो सिगरेट से भी खतरनाक! अक्सर एक हुक्का सेशन 30-80 मिनट तक चलता है, जोकि 100 सिगरेट पीने के बराबर होता है। हुक्का और सिगरेट दोनों के सेवन से अंत में कार्सिनोजन निकलता है। यह फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारी जैसी गंभीर डिजीज का कारण बन सकता है। वहीं, यह भी अवधारणा है कि सिगरेट की तरह हुक्का पीने की लत नहीं लगती। जबकि, हुक्के में भी सिगरेट की तरह निकोटीन मौजूद होता है, जो लोगों को अपना लती बना लेता है।

हुक्का दो भागों में बँटा होता है

हुक्का दो भागों में बँटा होता है। ऊपर वाला भाग तम्बाकू और फ्लेवर को जलाता है तो नीचे वाला भाग पानी के जरिए उसके धुएं को फ़िल्टर करता है, ताकि फ्लेवर फ्लो में आए। हुक्का पीने के लिए गहरी सांस लेनी पड़ती है जिसके कारण हुक्के का धुआं फेफड़ों के काफी भीतर तक चला जाता है। जाहिर तौर पर बाद में इसके बुरे नतीजे देखने को मिलते हैं।

‘फ्रूट फ्लेवर’ की असल सच्चाई

आजकल हुक्के का स्वाद बढ़ाने के लिए सेब, कॉफी, स्ट्राबैरी, अंगूर, चॉकलेट और चैरी जैसे बहुत से फ्लेवर आते हैं। चूंकि, नाम ही फलों पर होते हैं, तो इसका सीधा संदेश जाता है कि यह हानिकारक नहीं है। ऐसे में कम उम्र के बच्चे इस कारण इसकी ओर आकर्षित होते हैं और इसके लती हो जाते हैं। उनकी गलती नहीं है, असल में वह बचपन से ही सुनते आते हैं कि फल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। उन्हें क्या पता जिस ‘फ्रूट फ्लेवर’ के वह दीवाने होते हैं, उसके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है!

असल में फ्लेवर्ड हुक्के में सिर्फ स्वाद के लिए फ्रूट का कृत्रिम रस मिलाया जाता है। उसका असली फ्रूट्स से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं होता। चूंकि, यह रस ढ़ेर सारे रसायनों से बना होता है, इसलिए इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ना लगभग तय ही होता है।
कुल मिलाकर हुक्का कैसा भी हो उसका सेवन करने वाला व्यक्ति यह बिल्कुल नहीं कह सकता कि उसे इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

‘हुक्का शेयरिंग’ नहीं है सुरक्षित

अक्सर हुक्के का सेवन ग्रुप में किया जाता है। इस कारण पाइप का एक सिरा कई लोगों के संपर्क में आता है। हुक्के की यह शेयरिंग प्रक्रिया संक्रमित बीमारी जैसे-ट्यूबरक्लोसिस(टीबी), हेपेटाइटिस और हर्पीज़ वाइरस आदि को दावत देता है। वहीं दूसरी ओर हुक्के के भीतर लगातार कोयला जलने से उससे निकलने वाले कॉर्बन मोनोऑक्साइड व मेटल शरीर के लिए हानिकारक माने जाते हैं। यही नहीं, जो लोग हुक्के का सेवन कर रहे लोगों के आसपास बैठे होते हैं, उनके लिए भी यह मुसीबत का सबब बन सकता है। खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह कुछ ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है।

बताते चलेंं कि हुक्का पीने से धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं। इस कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

‘योगा’ दिला सकता है छुटकारा

अगर आप हुक्का पीने के शौक़ीन हैं, तो इससे दूरी बनाना ही आपके लिए अच्छा होगा। योगा इसमें आपकी बड़ी मदद कर सकता है। इसे आपके अंदर भटकाव की स्थिति कम हो सकती है, जो हुक्के की लत छुड़ाने में मददगार हो सकती है। योगा के साथ-साथ आप अपने खानपान में भी बदलाव करके हुक्के की लत से खुद को दूर रख सकते हैं।

अगर आपको फ्रूट्स का टेस्ट पसंद हैं तो हुक्का ही क्यों? आप अमरूद, संतरा, अनानास, आम, पपीता और केला जैसे ताजे फलों का सेवन कर सकते हैं।

यह ठीक है कि इस दौड़ती-भागती ज़िंदगी में लाइफस्टाइल बदलना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हम हुक्के जैसी बुरी चीजों के लती हो जाये. हमें चाहिए कि हम बुरी आदतों को छोड़कर खुद को फिट रखें। वैसे भी जिंदगी का असली मज़ा तो स्वस्थ रहने में ही है।