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इडूकी डैम में पानी भरा, आपातकालीन तैयारी, सेना, तटरक्षक और एनडीआरएफ तैनात

Rashtriya Khabar 2018-08-08 01:34:44
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  • डैम का जलस्तर 2396 फीट पहुंचा

  • 26 साल बाद खुलेगा डैम का यह फाटक

  • पिछली बार 80 किलो की मछलियां बह गयी थी

शालिनी टी एस



इडूकी: इडूकी डैम में अंतत: फिर से पानी भरने की वजह से चेतावनी का स्तर बढ़ा दिया गया।

अब पूरे राज्य में इस डैम के मद्देनजर नारंगी चेतावनी दी गयी है।

इसी एलर्ट के साथ साथ वहां सेना, तटरक्षक और आपदा रक्षक दल की टीमों को भी तैयार कर लिया गया है।

डैम में अब वर्तमान जलस्तर 2396 फीट है।

इसके बाद तीन फीट और जलस्तर बढ़ने ही रेड एलर्ट जारी कर दिया जाएगा।

उसके बाद डैम का फाटक खोलते ही नीचे के इलाकों में तबाही आयेगी

क्योंकि सारे इलाके पहले से ही जलमग्न हैं।

समझा जा रहा है कि जिस तेजी से जलस्तर बढ़ रहा है,

उस हिसाब से अगले चौबीस घंटे में इस डैम से रेड एलर्ट जारी करना ही पड़ेगा।

उस वक्त चेरूथोनी इलाके के डैम के फाटक खोल दिये जाएंगे ताकि डैम से पानी निकाला जा सके।

इडूकी डैम पर अब चौबीस घंटे नजरदारी

स्थानीय अधिकारी अब चौबीस घंटे इस डैम पर नजर बनाये हुए हैं

क्योंकि डैम की सुरक्षा की निरंतर निगरानी अब जरूरी हो गयी है।

नारंगी एलर्ट  के जारी होते ही सेना, तटरक्षक और एनडीआरएफ की टीमें डैम के इलाके में पहुंच गयी हैं।

इन टीमों को अलुवा, इडूकी, थिस्सूर, एलापुझा जिला में तैनात किया जा रहा है।

इसी क्रम में सेना और नेवी के साथ साथ वायुसेना को भी सतर्क रहने को कहा गया है

ताकि अचानक से स्थिति बिगड़ने की नौबत आने पर वहां से लोगों को तत्काल निकाला जा सके।

एयर फोर्स ने प्रारंभिक तौर पर अपने दो हेलीकाप्टर और चार कंपनी भी तैयार रखे हैं।

सेना की तरफ से बचाव नौकाओं को एरनाकूलम में लाया जा चुका है।

केरल राज्य बिजली बोर्ड ने 26 वर्षों के बाद इस डैम का फाटक खोलने का संकेत दिया है।

जो तैयारी की गयी है उसक मुताबिक यदि जरूरत पड़ती है तो डैम का फाटक चालीस सेंटीमीटर तक खोला जाएगा।

इस डैम के आस-पास चेरूथोनी और कुलामावू डैम भी है।

अधिकारी इस बात पर एकमत है कि जलस्तर के 24 सौ फीट पहुंचने के बाद

कोई खतरा नहीं उठाया जाएगा और फाटक खोल दिये जाएंगे।

उन्हें भय है कि इससे ज्यादा पानी आने पर डैम को ही खतरा हो सकता है।

डैम का फाटक खोलते ही चेरूथोनी डैम का पानी छह घंटे में अलुवा पहुंच जाएगा।

पिछली बार जब 1981 में इस डैम का फाटक खोला गया था

तो 80 किलो वजन की मछलियां भी पानी के साथ बहकर पेरियार नदी तक आ पहुंची थी।