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राजसमंद में बढ़ रहा पैंथरों का कुनबा

Patrika 2018-08-09 12:52:00

अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. राजसमंद का जंगल वन्यजीवों को रास आ रहा है। पिछले चार सालों में हुई वन्यजीव गणना के आकड़ों पर नजर डाले तो साफ होता है कि लोमड़ी को छोडक़र पैंथर, भालू, सहित अन्य मांसाहारी जीवों का कुनबा लगातार बढ़ा है। वहीं शाकाहारी जीवों में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। हालांकि चीतल और खरगोश जंगल से गायब हो रहे हैं, जो वनविभाग के लिए चिंता का विषय है। वर्ष २०१८ की गणना में यह गणकों की नजरों में नहीं आए।

बढ़ी है संख्या
पिछले चार सालों की गणना में इनकी संख्या क्रम से बढ़ती हुई देखी गई है। पैंथर वर्ष २०१५ में १२१, २०१६ में ७२, २०१७ में १३६ तथा २०१८ में १७८ नजर आए। इसमें अगर वर्ष २०१६ को छोड़ दें तो पूरी संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। इसीतरह भालुओं की संख्या बढ़ी है।

खरगोश पर संकट
वन्यजीवों की गणना को भले ही विभाग पूरी तरह से सही नहीं मानता हो लेकिन गणना के दौरान उनका नजर न आना उनकी संख्या में आई कमी को स्पष्ट करता है। क्योंकि वर्ष २०१५ में जिले में ३५०, २०१६ में २२३, २०१७ में ४०४ खरगोश दिखाई दिए थे, लेकिन वर्ष २०१८ की गणना से इनका एकदम गायब होना चिंतन का विषय है। खरगोश के साथ ही चीतल और लोमड़ी भी जिले के जंगल से नदारद हो रहे हैं।

वन्यजीव में विलय हुआ प्रादेशिक वन मंडल

राजसमंद. वन एवं वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन तथा सुरक्षा एवं संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए वनविभाग ने जिले में संचालित प्रादेशिक वनमंडल को वन्यजीव मंडल में विलय कर दिया। इससे अब एक ही छत के नीचे वन्यजीव तथा वन से संबंधित सभी काम होंगे। इसके लिए लोगों को अलग-अलग कार्यालयों में चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।


एक डीएफओ का पद समाप्त
अभीतक राजसमंद में प्रादेशिक वनमंडल व वन्यजीव की दो अलग-अलग टीमें थी, इसके तहत यहां दो डीएफओ के पद थे, कार्यालय का विलय होने से एक डीएफओ का पद समाप्त कर दिया गया। अब पूरे क्षेत्र जिम्मेदारी एक डीएफओ, पांच एसीएफ व १२ क्षेत्रीय वन अधिकारियों के कंधे पर रहेगी।