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क्या सच में चाइनीज सपनों के फैर में उलझ गए है, ये देश ?

Samachar Nama 2018-08-09 12:52:59

जयपुर, चीन दुनिया की सबसे महत्वकांक्षी विकास परियोजना को स्वरूप देने में लगा हुआ है। इस योजान का नाम वन बेल्ट वन रोड परियोजना है जिसमें 78 देश शामिल हैं, लेकिन इस परियोजना को लेकर कई देशों का कहना है कि चीन के इस सपनों के फैर से निकलना बहुत मुश्किल होगा। इसी के चलते पाकिस्तान, लाओस, श्रीलंका, मोंटेनेग्रो, व मलेशिया पर चीन के बढ़ते कर्ज को लेकर पूरे विश्व में चर्चा हो रही है।

इस परियोजना की खास बात तो यह है कि जिन देशों में यह प्रोजेक्ट चल रहा है उन देशों को इसकी कीमत नहीं बताई जा रही है। चीन की इस नीति को लेकरन वॉशिंगटन के एक थिंक टैंक आरडब्ल्यूआर अडवाइजरी ग्रुप का कहना है कि प्रोजेक्ट की लागत और चीन से मिलने वाले क़र्ज़ की रक़म पूरी तरह से अपारदर्शी है। इसमें आगे चलकर क्या होगा। इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। फाइनैंशियल टाइम्स के अनुसार चीन ने जिन देशों को इस परियोजना में शामिल किया है उनकी आर्थिक हालत बहुत खराब हैं।

जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि किस तरह से यह देश कर्ज को वापस कर पाएंगे। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान को ही देखा जा सकता है। क्योंकि इस देश में बनने वाली नई सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि दिसंबर तक बेलआउट के लिए संपर्क किया जाएगा। वहीं दूसरी और चीन पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर की परियोजना पर काम कर रहा है। पाकिस्तान चीन से भारी मात्रा मे आयात कर रहा है जिसके चलते खर्च भी बहुत बढ़ गया है। जबकि पाकिस्तान का खजाना खाली होनें की कगार पर है।

एशिया इकनॉमिस्ट ऐट कैपिटल इकनॉमिक्स रिसर्च फ़र्म ने कहा है कि पाकिस्तान के ये हालात चीनी परियोजना में लगने वाले सामनों के चीन से आयात के कारण हुए हैं। पाकिस्तान के खजाने में विदेशी मुद्रा भंडार मात्र10 अरब है जबकि उसे 12.7 अरब का भुगतान करना है। इसी के चलते विशेषज्ञों का मानना है कि सभी छोटे देश चीन के सपनों के फैर में उलझते जा रहे हैं।