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तो इसलिए नहीं बन सका काला ताजमहल, हकीकत जानकर होगा ताज्जुब

Naukri Nama 2018-08-09 12:55:11

जयपुर। आगरा के ताज महल से तो सारी दुनिया भली भांति परिचित है। दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज को मोहब्बत की निशानी के तौर पर जाना जाता है। आपको बता दे कि सफेद संगमरमर से बना यह आलीशान महल मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज के लिए बनवाया था। यहां हर दिन लाखों पर्यटक घूमने आते है। यमुना के तट पर बना यह महल पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। मगर क्या आप जानते है कि शाहजहां ने एक और ताजमहल बनाने की वसीयत भी की थी, जिसे बाद में पूरा नहीं किया।

जी हां, काले पत्थरों से बना एक और ताजमहल शाहजहां की आखिरी इच्छा थी, मगर उसके क्रूर पुत्र औरंगजेब ने पिता की इस आरजू को कभी पूरा ही नहीं होने दिया। अगर औरंगजेब ने अपने पिता की बात मानी होती तो आज दुनिया में दो ताजमहल होते। शाहजहाँ ने अपने वसीयत लिखा था कि उसकी कब्र को काले ताजमहल में स्थापित करवाया जाए। मगर शाहजहाँ के पुत्र औरंगजेब ने ऐसा होने ना दिया।

यह काला ताजमहल मौजूदा ताज महल के ठीक पीछे की ओर बनाया जाना प्रस्तावित था। जी हां, खुद शाहजहाँ ने अपनी वसीयत में इसके बारे में लिखा था। ताज महल के पुरातत्व दस्तावेजों से यह रहस्य उजागर होता है कि शाहजहां को मरन के बाद ताजमहल के पीछे स्थित मेहताब बाग में दफ्नाया जाना प्रस्तावित था। इसी जगह यह काला ताजमहल बनना था। मगर औरंगजेब ने शाही खजाने में कमी का हवाला देते हुए इसे बनने ही नहीं दिया।

गौरतलब है कि कट्टर औरंगजेब मकबरे बनाने को फिजूल खर्ची मानता था, साथ ही इस्लाम के अऩुसार भी पक्की कब्र बनवाना सही नहीं था। इसी वजह से उसने उलेमाओं से राय लेते हुए काले ताजमहल को बनने नहीं दिया। इस तरह दुनिया उस काले ताजमहल को कभी नहीं देख पाई जो कि इतिहास के पन्नों में दर्ज था।