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“लावारिस शहर-27″* वाह सूबा (कलेक्टर) साहब,विशुद्ध ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का इनाम “निलंबन…”* *(शिवपुरी BRCC निलंबन प्रहसन….)*

khabaraajkal.com 2018-08-10 10:18:49

“लावारिस शहर-27″* वाह सूबा (कलेक्टर) साहब,विशुद्ध ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का इनाम “निलंबन…”* *(शिवपुरी BRCC निलंबन प्रहसन….)*

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*लावारिस शहर-27*
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*वाह सूबा (कलेक्टर) साहब,विशुद्ध ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का इनाम “निलंबन…”*
*(शिवपुरी BRCC निलंबन प्रहसन….)*
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*सूबा (कलेक्टर)साहब*
ने अपनी सरकारी तफरीह के दौरान सतनबाड़ा क्षेत्र में विद्यालयों का भृमण किया और स्कूल परिसर में प्याज भंडारण को लेकर तात्कालिक दोषी मानते हुए कर्तव्य निष्ठ शिवपुरी बीआरसीसी पर निलंबन की गाज गिरा दी…..!
*”सूबा साहेब,*
आपकी नजर में यह कार्यवाही भले प्रथम द्रष्टव्या माकूल हो,किन्तु कही न कही आपने सरकारी मशीनरी में मौजूद चंद कर्तव्यपरायनो में से एक को तिरस्कार का दंश सीधे तौर पर दोषी न होते हुए भी दे दिया….!
*जरा सोचिए….,*
👉 *क्या सर्वप्रथम दोषी वह दबंग व्यक्ति नही जिसने स्कूल के कमरे में प्याज भरने की हिमाकत की….!*
👉 *क्या दोषी वह संस्थाप्रधान नही जिसने स्कूल परिसर में प्याज भंडारण करने दिया या दबंग के डर से इस बात को वरिष्ठ अधिकारियों से छुपाए रखा….!*
👉 *क्या दोषी वे CAC नही जिनका मूल काम ही क्षेत्र की शालाओं का सतत भृमण करना है…..!*
✒ *पुनः विचार कीजिये…*
BRCC शिक्षा महकमे का वह अदना सा सिपाही है जो सम्पूर्ण ब्लॉक की जबाबदारी रखता है।ऐसे में किसी सूचना पर कार्यवाही न करने पर तो वह दोषी माना जा सकता है किंतु अन्य प्रथम जिम्मेदारों द्वारा जो जानकारी उस तक भेजी ही नही गयी ,उसके लिए भी समूचा दोष उसके सर माथे मढ़ना कहा का तर्कसंगत है…..!
brcc अंगद सिंह की 20 साल की नोकरी ईमानदारी,पदेन दायित्वों का उचित निर्वहन,पद को कर्म की तरह पूजनीय मानते हुए बेदाग रही,ऐसे में बिना सबाल-जबाब,बिना नोटिस के सीधे निलंबन करना क्या उनके मानसिक मनोबल को तोड़ना प्रतीत नही होता….!*
*अरे सूबा साहेब,*
*भृष्ट,लापरवाह ओर अकर्मण्य अफसरशाही के लिये “निलंबन”भले कोई महत्व नही रखता हो किन्तु कुर्सी पर बैठकर पद की गरिमा का बेहतर निर्वहन करने बाले स्वाभिमानी व्यक्ति के लिये आपका यह उपहार आजीवन के लिए नासूर बन सकता है….!*
पुनर्विचार कीजिये सूबा साहेब,
कही तात्कालिक रोष में कुछ गलत तो नही हो गया…!
आत्मावलोकन कीजिये,क्योंकि ये पंक्तियां तो आपने भी भली भांति सुनी ही होगी कि-
*”निर्बल को न सताइये,जाकी मोटी हाय….”*
*बिना जीव की स्वांस से,लोह भसम है जाये….!”*
*ईश्वर,सद्बुद्धि दे….!*
*खैर करे…!*
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*नाचीज-बृजेश तोमर*
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*नोट- मंदबुद्धि कलमकार एक लंबे समय बाद”लावारिस शहर” को पुनः लिखने विवश हुआ।आंख बंद करके गलत को सही स्वीकार करना आदत में शुमार नही।खुदा हुक्मरानों को सही और गलत जांचने की सद्बुद्धि दे।खुदा, खैर करे……!!*
*www.khabaraajkal.com*
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