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उड़द को पीले रोग का डर, इस बार 60 हजार हेक्टेयर में ही बोई फसल

Patrika 2018-08-10 14:32:30

गुना. जिले में खरीफ सीजन के बोवनी लभगभ लक्ष्य के करीब हुई है और किसान भी अच्छी फसल की उम्मीद लगा रहे हैं। जिले में पिछले वर्ष जहां उड़द का रकबा सोयाबीन से अधिक था, वहीं इस बार फिर किसानों फिर से सोयाबीन की ओर रुख किया है। पिछले साल की तुलना में करीब 90 हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई है।


कृषि उप संचालक पी गुजरे ने बताया कि जिले में 3 लाख हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से कुल 2 लाख 94 हजार हेक्टेयर में बोवनी हुई है। यानी लगभग 97 प्रतिशत क्षेत्र में बोवनी हो चुकी है। इस बार किसानों ने सोयाबीन अधिक बोया है।

पिछले वर्ष जहां 1 लाख 6 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई थी, वहीं इस बार 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन बोया गया है। सोयाबीन का रकबा बढऩे का मुख्य कारण इसमें रिस्क का कम होना है।

कृषि वैज्ञानिक वरुण जादौन के अनुसार सोयाबीन में रिस्क कम होता है और इसमें रोग नहीं लगता। इल्ली की समस्या होती है जो दवा के छिड़काव से नियंत्रित की जा सकती है। इसलिए किसान सोयाबीन की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इसके अलावा पूर्व से भी क्षेत्र में सोयाबीन की ही पैदावार अधिक होती रही है। जो इस साल बरकरार रहेगी।

रिस्क की आशंका से उड़द का रकबा घटा
पिछले साल बड़ी संख्या में किसानों ने उड़द की बोवनी की थी। जिले में 1 लाख 51 हजार हेक्टेयर में उड़द बोई गई थी। बारिश कम होने के कारण किसानों ने उड़द बोई थी। लेकिन इसमें पीला रोग लगने के कारण नुकसान की आशंका के चलते इस बार किसानों ने उड़द को छोड़कर सोयाबीन की बुवाई की है। इस सीजन में केवल 60 हजार हेक्टेयर में ही उड़द बोई गई है। जो पिछले साल से आधे से कम है।

उड़द को यलो मोजेक से खतरा
उड़द की फसल को सर्वाधिक नुकसान यलो मोजेक (पीला रोग) पहुंचाता है। यह रोग सफेद मच्छरों के कारण होता है। किसान उड़द की फसल में सफेद मच्छर के नियंत्रण के लिए एसीटामिपिड 20 प्रतिशत एसपी दवा का 10 ग्राम प्रति पंप के हिसाब से छिड़काव करें। यह बीमारी खतरनाक है और कम समय में ज्यादा क्षेत्र में फैल जाती है। एक बीघा में ५-६ पंप दवा का स्प्रे करें।

गर्डल बीटल का प्रबंधन
कृषि वैज्ञानिक जादौन के अनुसार सोयाबीन में गर्डल बीटल से अधिक नुकसान होता है। इसलिए इसका नियंत्रण आवश्यक है। किसान गर्डल बीटल से फसलों को बचाने के लिए ट्राईजोफास 40 प्रतिशत दवा का छिड़काव ४० एमएल प्रति पंप के हिसाब से करें। एक बीघा में कम से कम 5-6 पंप दवा का स्प्रे करना चाहिए। कम स्प्रे से कीटों का नियंत्रण पूरी तरह से नहीं हो पाता।