newsdog Facebook

अनुदानित समायोजित कर्मचारी होंगे पुरानी पेंशन के हकदार

Press Note 2018-09-14 11:16:28

उदयपुर - राजस्थान सरकार द्वारा जुलाई 2011 में राजस्थान के अनुदानित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षाकर्मियों को राजस्थान स्वेच्छाया ग्रामीण शिक्षा सेवा अधिनियम-2010 के तहत सरकार में समयोजन के पश्चात् इन शिक्षाकर्मियों को पेंशन योजना 1996 से वंचित रखने की नीति बनाई राजस्थान सरकार की दौयम नीति के विरूद्ध राजस्थान मायोजित शिक्षा कर्मी वेलफेयर सोसायटी द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जोधपुर की डबल बैंच में दो याचिकाएँ दायर की गई इन याचिकाओं पर माननीय न्यायाधीश श्री गोपालकृष्ण व्यास व श्री मनोज गर्ग साहब की बैंच ने इन शिक्षाकर्मियों को पुराने कर्मचारी मानते हुए पेंशन योजना 1996 के अनुसार पुरानी पेंशन देने का आदेश पारित किया सोसायटी के लिए विद्ववान

अधिवक्ता महेन्द्र सिंह सिंघवी व मनोज भण्डारी ने पैरवी की। राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर पीठ के निर्णय के विरूद्ध राज्य सरकार ने एसएलपी दायर कर इस निर्णय को सर्वोच्चय न्यायालय में चुनौती दी राज्य सरकार की एसएलपी पर सर्वोच्चय न्यायालय के माननीय न्यायाधीश अरूण मिश्रा व विनीत शरण की डबल बैंच ने जोधपुर उच्च न्यायालय के आदेश को यथावत रखते हुए ये निर्णय दिया की अनुदानित संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी जो राजस्थान स्वेच्छाया ग्रामीण शिक्षा सेवा के अन्तर्गत समायोजित किये गये थे उन्हें पुरानी पेंशन योजना 1996 के तहत कर्मचारियों की मूल नियुक्ति तिथि से सेवाकाल की गणना करते हुए इन्हें पुरानी पेंशन देय है। सवोच्चय न्यायालय में राजस्थान सरकार की ओर से भारत सरकार के अतिरिक्त साॅलीसिटर जनरल पी.एस. नरसिम्हन व वेलफेयर सोसायटी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता डाॅ. मनीष सिंघवी व एश्वर्या भाटी ने पैरवी की। सर्वोच्चय न्यायालय के इस निर्णय से राजस्थान समायोजित शिक्षाकर्मियों में में प्रान्त व्यापी हर्ष की लहर है तथा प्रदेश अध्यक्ष श्री सरदारसिंह गुगालिया व शिवशंकर नागदा, महेश सोनी, एम.सी. मालू, नवीन शर्मा, मनोहर सिंह पालावत, देशराज मान, गोपाल छंगाणी ने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए न्यायपालिका व विधि वेत्ताओं का आभार व्यक्त किया।