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ये है छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी परिपथ

Patrika 2018-09-14 18:57:08

रायपुर. छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश में आदिवासी परिपथ का विकास किया जा रहा है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत यह देश की दूसरी परियोजना है। इस आदिवासी परिपथ के माध्यम से पर्यटक छत्तीसगढ़ की आदिवासी एवं जनजाति संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। इस परिपथ का विकास आदिवासी संस्कृति एवं पर्यटकों के लिए स्तरीय सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

यह है ट्राइबल टूरिज्म सर्किट
आदिवासी परिपथ में आएगा छत्तीसगढ़ का जशपुर, कुनकुरी, मैनपाट, महेशपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथियानवागांव, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, तीरथगढ़। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने फरवरी 2016 में 99.21 करोड़ रुपए की लागत से इस परियोजना को मंजूरी दी थी।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री करेंगे उद्घाटन
केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री के.जे. अलफोंस 14 सितम्बर को धमतरी के गंगरेल स्थित बरदिहा लेक व्यू रिसोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी परिपथ का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के पर्यटन मंत्री दयालदास बघेल करेंगे।

74 परियोजनाओं को मंजूरी
स्वदेश दर्शन पर्यटन मंत्रालय की सबसे अहम परियोजनाओं में से एक है जिसके तहत एक विषय पर आधारित पर्यटन परिपथों का एक योजनाबद्ध ढंग से विकास किया जाना है। इस योजना को 2014-15 में आरंभ किया गया था और अभी तक मंत्रालय ने 31 राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों में 5997.47 करोड़ रुपए की लागत की 74 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 30 से अधिक परियोजनाओं या इनके महत्वपूर्ण हिस्सों के इस वर्ष पूरा होने की उम्मीद है।

आदिवासी संस्कृति के विकास पर विशेष ध्यान
आदिवासियों एवं आदिवासी संस्कृति के विकास पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का विशेष ध्यान है। मंत्रालय आदिवासी क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है और स्वदेश दर्शन योजना के तहत इन क्षेत्रों में पर्यटन के ढांचे का विकास कर रहा है। आदिवासी परिपथ विषय के तहत मंत्रालय ने नगालैंड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में 381.47 करोड़ रुपए की लागत से 4 योजनाओं को मंजूरी दी है।