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अब वायुसेना के डॉक्टर भी उड़ाएंगे युद्धक

Patrika 2018-09-14 18:58:43

बेंगलूरु. लगभग चार दशक बाद भारतीय वायुसेना फिर एक बार डॉक्टर-पायलट कार्यक्रम शुरू करेगी जिसमें वायुसेना के चिकित्सकों को युद्धक और परिवहन विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस बात की पुष्टि करते हुए वायुसेनाध्यक्ष बीएस धनोआ ने कहा कि इससे डॉक्टरों का मरीजों से संबंध और प्रगाढ़ व बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को पुन: शुरू करने का सुझाव भारतीय सेना के चिकित्सा सेवा महानिदेशालय से ही मिला है। भारतीय एयरोस्पेस मेडिसिन सोसायटी भी इसकी मांग कर रही थी।
यहां 57 वें भारतीय वांतरिक्ष चिकित्सा सम्मेलन के पहले दिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) में अपने अध्यक्षीय संबोधन में एयर मार्शल सीके रंजन ने कहा कि इससे डॉक्टरों को कू्र सदस्यों और विशेष रूप से पायलटों की परिस्थितियों एवं चुनौतियों को सही तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। वायुसेना अध्यक्ष धनोआ के प्रति अभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि चार दशक तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद वायुसेना डॉक्टर-पायलट परियोजना को फिर से पुनर्जीवित कर रही है। यह एयरोस्पेस चिकित्साकर्मियों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा और उन्हें कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी। इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन के अधिकारियों ने भी जोर देकर कहा है कि बदलते परिदृश्य के साथ ही नए युद्धक व साजो-समान वायुसेना में शामिल हो रहे हैं, ऐसे में डॉक्टर-पायलट परियोजना टिकाऊ और दीर्घावधि में फायदेमंद साबित होगी।
आइएएम के कमांडेंट अनुपम अग्रवाल ने डोकलाम विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि स्क्वाड्रन डॉक्टर कू्र सदस्यों का सबसे विश्वसनीय व्यक्ति होता है। चिकित्सक और कू्र सदस्यों के बीच का अच्छा संबंध व एक-दूसरे पर विश्वास किसी भी मिशन की सफलता और सुरक्षा के लिए जरूरी है। वायुसेना अध्यक्ष धनोआ ने कहा कि यह कार्यक्रम फिर से शुरू किया जाएगा और उन्हें विश्वास है कि इसका लाभ वायुसेना को मिलेगा। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि पायलटों को डॉक्टर बनाना बहुत मुश्किल है इसलिए बेहतर है कि डॉक्टरों को ही पायलट बनाया जाए।