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राजस्थान में एक ऐसा मंदिर जहां माताजी करती है अग्नि स्नान

First News India 2018-10-10 08:37:48

कुराबड़(उदयपुर)। मेवाड के शक्तिपिठों में से एक शक्तिपिठ ईडाणामाता के नाम से भी  जाना जाता है । राजस्थान का एकमात्र मन्दिर है जहां माताजी अग्नि स्नान करती है । सर्व मनोकामना पूरी करने वाली ईडाणा माता को मेवल महाराणी भी कहते है । 

पेड़ के निचे प्रकट हुए थे माताजी :-

मिथकों के अनुसार ईडाणा माताजी एक बरगद के पेड के निचे प्रकट हुए । कालांतर में एक संत उस क्षेत्र से निकल रहे थे । स्वंय माताजी एक कन्या के रूप में दर्शन दिए और उसको यही रहने का निवेदन किया । संत ने भक्ती की ओर आराधना आरम्भ की तो कुछ ही दिनों में यहाँ चमत्कार पर चमत्कार होने लग गए । यहां पर अन्धो को आंखों से दिखाई देने लगा, लकवा वाले ठिक हुए ,निसन्तानो को औलाद दी,एवम सभी श्रधालुऔ कि मनोकामनाए पुरी होने लगी । ऐसे में धीरे धीरे प्रचार प्रसार होने के बाद आज राजस्थान ही नही अपितु गुजरात , महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश समेत देश के कोने कोने से श्रद्धालुओं का यहां जमावडा लगने लगा ।  

अग्नि स्न्नान भी बड़ा रोचक होता है :- 
अग्नि स्नान करने वाली मेवल महारानी का अग्नि स्नान भी बड़ा रोचक होता है । बताया गया कि माताजी  के ऊपर भार होते ही माताजी अग्नि स्नान कर लेती है । जानकारी के अनुसार माताजी को चूंदड़ कपड़े आदी चढ़ावा चढाया जाता है । जैसे ही माताजी के ऊपर इनका भार हो जाता है स्वतः माताजी अग्नि का स्नान कर देती है । चढ़ावे के पहने कपडे को जला देती है । इस पर समीप ही बरगद के पेड को चपेट मे ले लेती है परन्तु माताजी कि मुरत पर कोई भी असर नहि होता तथा अग्नी स्नान के वक्त माताजी की मूर्ति सही सलामत रहती है ।

दूसरी तरफ माताजी के समीप अखण्ड ज्योत भी जलती है उसे भी कोई असर नही होता है । पहले चिती (एक प्रकाश का सांप) के दर्शन हर रवीवार को होते थे पर आजकल किसी क़िस्मत वाले व्यक्ति को ही दर्शन होते है और चिती की झलक से सारी मनोकामनाए पुरी होति है । ऐसी मान्यता है माताजी कि प्रतीमा खुले मे विराजीत है उनके उपर कोई भी छाया नाम का नामों निशान तक नहि है । जबकी वहा पर धर्मशालाओं ओर आवासीय परिसर और  ट्रस्ट है । माताजी के दर्शन हेतु  दूर दराज से श्रधालु आते है , प्रत्येक रविवार को मेला लगता है भक्तो कि मनोकामनाए पूरी होने पर प्रसादी का आयोजन करते है। साथ ही चैत्री और शारदीय नवरात्र मे नो दिनो तक हवन यग्य का कार्यक्रम होता है । अष्टमि और नवमी को देवी मां के दरबार में विशेष भीड रहती है । नारायण मेघवाल फर्स्ट इंडिया न्यूज कुराबड़