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नवरात्रि 2018: आज के दिन देवी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की ऐसे करें पूजा, यह है विधि और महत्व

Live India 2018-10-10 19:40:44
New Delhi: नवरात्र की द्वितिया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है इसलिए 11 अक्टूबर, गुरुवार को ब्रह्मचारिणी देवी का पूजन किया जाएगा।

ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानि तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं।

पूजन विधि

सबसे पहले चौकी (बाजोट) पर माता ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।

इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां ब्रह्मचारिणी सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। इसके बाद प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान मंत्र

दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

अर्थ: देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। मां के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है।

दूसरे दिन क्यों करते हैं देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा?

नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का ये स्वरूप तपस्या का प्रतीक है। देवी ने सफेद वस्त्र धारण किए हैं। अर्थ ये है कि जब हम तपस्या के मार्ग पर उतरे तो हमारा मन एकदम सफेद यानी स्वच्छ होना चाहिए। तभी हम ईश्वर को पा सकेंगे। मन में अगर किसी भी तरह का मैल यानी बुरी भावना हो तो ईश्वर को नहीं पाया जाता। यही कारण है कि नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।


महत्व

उदात्त कौमार्य शक्ति की पर्याय देवी ब्रह्मचारिणी के बारे में कहा गया है कि इन्होंने परमात्मा के ब्रह्म स्वरूप की प्राप्ति को ही अपना सर्वस्व माना था। इसलिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वालों को परमात्मा की प्राप्ति होती है। ब्रह्मचारिणी देवी ज्योतिर्मयी हैं। आनंद से परिपूर्ण हैं। इनकी पूजा करने वालों को सात्विक साधना का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्मपिता के आचरणों पर चलने और ब्रह्मलोक में स्थित परमात्मा में ध्यान लगाने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को ब्रह्मचारिणी कहा गया है।

इनकी पूजा करने वालों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। माता ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से भक्तों में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। इनके भक्तों को हर कार्य में सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। हमेशा रुद्राक्ष की माला धारण करने वाली देवी ब्रह्मचारिणी के बारे में पुराणों में कहा गया है कि ये ब्रह्मा के तेज से उत्पन्न हुई थीं। इसलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। जो श्रद्धालु माता ब्रह्माचारिणी की उपासना ब्रह्मा मंत्र पढ़कर करते हैं, उन पर ये देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। अपने भक्तों को पर देवी ब्रह्मचारिणी हमेशा कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं।

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