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फीका रहा उद्घाटन, गुस्साई मेला समिति ने आयुक्त को घेरा, हंगामे को देख अधिकारी लौटे

Patrika 2018-10-10 22:19:20

 

कोटा. कोटा की शान और देश में अपनी अलग पहचान के लिए ख्यात राष्ट्रीय दशहरा मेला अपने 125वें आयोजन में सरकारी मशीनरी की उदासीनता की भेंट चढ़ गया। जिस तरह तीन माह से मेले को भव्य रूप देने की मेला समिति और आयुक्त बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे, उसकी बुधवार को उद्घाटन समारोह में पोल खुल गई। उद्घाटन शुरू होते ही पाण्डाल की ज्यादातर कुर्सियां खाली हो गई।
फीकी रंगत देख मेला समिति अध्यक्ष व सदस्य आयुक्त जुगलकिशोर मीणा पर बिफर पड़े। श्रीराम रंगमंच पर ही आयुक्त को घेर लिया और खरी-खरी सुनाई। निगम प्रशासन के रवैये से महापौर भी खफा हो गए। उन्होंने कहा कि आयुक्त पद की गरिमा ही भूल गए। राष्ट्रीय दशहरा मेले को डोल ग्यारस का मेला बना दिया।

उद्घाटन कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए महिला सफाई कर्मचारियों, आंगनबाड़ी सहायिकाओं व स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को शाम चार बजे ही बुला लिया गया। दो घंटे तक इंतजार के बाद भी उद्घाटन कार्यक्रम शुरू नहीं होने से महिलाएं परेशान हो गई, जो घर जाने लगी तो उन्हें भोजन का लालच देकर रोकने की कोशिश की गई। निर्धारित समय से करीब डेढ़ घंटे देरी से कार्यक्रम शुरू हुआ। संभागीय आयुक्त के.सी. वर्मा ने ध्वजारोहण कर उद्घाटन किया। आयुक्त मीणा ने मेले के आयोजन के बारे में बताया। उपायुक्त श्वेता फगेडिय़ा ने आभार जताया।


लाइटिंग बहाना, उपेक्षा पर बिफरे
मेला समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा, सदस्य नरेन्द्र हाड़ा, प्रकाश सैनी, महेश गौतम लल्ली, रमेश चतुर्वेदी ने कहा कि मेला समिति के समक्ष रंगमंच व मुख्य दरवाजे से जिस तरह की लाइटिंग करने का डेमो दिया गया था, वह क्यों नहीं लगाई गई। इसे लेकर आयुक्त का घेराव किया, लेकिन असली वजह अधिकारियों द्वारा महापौर, न्यास अध्यक्ष व मेला समिति पदाधिकारियों को कोई तवज्जो नहीं देना रहा। कोई अधिकारी लेने तक नहीं गया। यह मेला समिति को अखर गया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही आयुक्त को घेर लिया। मेला समिति ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण मेला फेल हो गया।

अनुचित व्यवहार किया

आचार संहिता का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी गरिमा ही भूल जाएं। कार्ड देकर न्यास अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम में अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को अपमानित किया। यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। मेला आयुक्त का नहीं है। यह शहर का मेला है। डोल ग्यारस जैसा मेला बना दिया है।
महेश विजय, महापौर