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गांव की सफाई का सपना रह गया अधूरा

Patrika 2018-10-10 22:33:24

श्रीगंगानगर। शहरी क्षेत्र की तर्ज पर गांवों में साफ सफाई के साथ साथ कचरे का उठाव और उसके निस्तारण के लिए राज्य सरकार ने योजना बनाई लेकिन आचार संहिता से सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। आचार संहिता के कारण जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए करोड़ों रुपए की योजना को मंजूरी मिलने के बावजूद धरातल पर काम नहीं हो पाएगा। स्वच्छ भारत अभियान ग्रामीण की ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन योजना दो अक्टूबर को शुरू की गई।

 

विधानसभा चुनाव से ऐनवक्त पर इस योजना के माध्यम से प्रत्येक गांव में साफ सफाई के साथ साथ कचरे का संग्रहण और उठाव करने के लिए गाइड लाइन तक बनाई गई। यहां तक कि कचरा निस्तारित करने के लिए वहां की आबादी एरिया के अनुुरुप श्रमिकों को वहां सफाई कार्मिक की तरह काम करवाना और उसे मेहनताना देना था। जिले की श्रीगंगानगर पंचायत समिति के अलावा अनूपगढ़, घड़साना, श्रीकरणपुर, पदमपुर, सादुलशहर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर की कुल 286 ग्राम पंचायतों के लिए 90 करोड़ 75 लाख रुपए का बजट मंजूर कर लिया गया। इसमें स्वच्छ भारत मिशन के मद से 51 करोड़ 87 लाख 75 हजार रुपए और मनरेगा मद से 38 करोड़ 87 लाख 44 हजार रुपए शामिल है।

 

ऐसी होनी थी प्रत्येक गांव में सफाई
इस योजना की गाइड लाइन के अनुसार ग्राम पंचायत के प्रत्येक गांव में करीब एक सौ घरों के आगे कचरे का नियमित उठाव, वहां प्रत्येक गली में सफाई और कचरे का ठोस निस्तारित करना था। संबंधित श्रमिक को सप्ताह में तीन दिन और माह में बारह दिन और एक साल में 144 दिन सफाई का कार्य करने का टारगेट दिया था। नियोजित श्रमिक की ओर से कचरा संग्रहण को ठोस कचरा संग्रहण केन्द्र तक लाना था। बिखरी आबादी वाले गांव में घरों की संख्या तीन सौ तक की गई थी।

 

कचरा ढोने के लिए हाथ गाड़ी की व्यवस्था, दस से पन्द्रह परिवार समूह के लिए एक सार्वजनिक पात्र उपयुक्त स्थल रखने, साइकिल रिक्शा के लिए तीस हजार रुपए प्रति रिक्शा की खरीद करना था। इसके अलावा सफाई कार्य करने वाले श्रमिक को सुरक्षा के उपकरण जैसे मास्क, दस्ताने के लिए पांच सौ रुपए खर्च करना था।
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