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राजधानी की प्यास का पक्का इंतजाम

Divya Himachal 2018-10-10 22:32:25

शिमला—राजधानी शिमला की प्यास बुझाने के लिए प्रस्तावित विश्व बैंक की कोल डैम परियोजना को 17 अक्तूबर को फाइनल अप्रूवल मिलेगी। सूत्रों के अनुसार 15 अक्तूबर को विश्व बैंंक की टीम इस संबंध मंे शिमला आ रही है, जिससे पहले 12 अक्तूबर को दिल्ली में बैठक बुलाई गई है। सचिव आईपीएच व शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के अधिकारी इस बैठक के लिए दिल्ली जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि कोल डैम प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ गई है। इससे पहले आईपीएच विभाग ने अपने स्तर पर प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाई थी, लेकिन विश्व बैंक ने इसे रिवाइज्ड करवाया है और नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। इसका काम आखिरी चरण में था, जो कि अब पूरा हो चुका है। इसकी डीपीआर पर 12 तारीख को दिल्ली में होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी। बताते हंै कि प्रोजेक्ट की लागत अब 929 करोड़ रुपए की होगी। इतनी राशि की मांग प्रदेश सरकार विश्व बैंक से करेगी और उम्मीद है कि इसे मंजूरी भी मिल जाएगी। क्योंकि डीपीआर बनवाने का काम खुद विश्व बैंक ने करवाया है। लिहाजा उसे पता है कि प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी है। पहले यह 600 से 700 करोड़ रुपए के मध्य थी, जो अब बढ़ जाएगी। 15 अक्तूबर को विश्व बैंक की टीम के सदस्य शिमला आएंगे, जो यहां पर 17 तारीख तक रहेंगे। इन दो-तीन दिनांे में प्रोजेक्ट के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी और इसे फाइनल अप्रूवल मिलेगी। इससे पहले विश्व बैंक सैद्धांतिक रूप से इसे मंजूरी दे चुका है वहीं वांशिगटन में  विश्व बैंक की बैठक में भी इस पर चर्चा के दौरान इसे मंजूरी दे दी गई है। अब फाइनल अप्रूवल के लिए यहां विश्व बैंक की टीम आ रही है। माना जा रहा है कि इसके बाद समझौते का दिन भी तय कर दिया जाएगा और यहां पर कोल डैम प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो जाएगा। कोल डैम प्रोजेक्ट राजधानी शिमला के लिए महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से आगामी 50 साल तक शिमला में पानी की कमी पेश नहीं आएगी। यही नहीं शहर में 24 घंटे पानी की सप्लाई को सुनिश्चित बनाया जाएगा, जिससे लोगों को कभी दिक्कत नहीं होगी। अभी भी शहर में पूरी तरह से रोजाना पानी नहीं आ रहा है और राशनिंग पहले की तरह चल रही है। हर साल गर्मियों में यहां लोगों के हलक सूख जाते हैं, मगर कोल डैम से पेयजल आपूर्ति होने से लोगों की सालों से चल रही समस्या दूर हो जाएगी। इस प्र्रोजेक्ट के संचालन के लिए सरकार ने विशेष रूप से शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड का गठन किया है, जो कि विश्व बैंक की शर्तों में शामिल था। प्रोजेक्ट के तहत शिमला के लिए सुन्नी के घराटनाला से पानी को लिफ्ट किया जाएगा।