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MP: पहले कांग्रेस से मांग रहे थे 40 सीट, अब इस पार्टी के नेता डॉक्‍टरी छोड़ खुद कांग्रेस से उतरे

Kakkajee 2018-11-06 13:15:00

भोपाल: बसपा से गठबंधन नहीं होने के बाद कांग्रेस आदिवासी तबके में पैठ रखने वाली जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) से चुनावी गठबंधन करने की कोशिशें कर रही थी. लेकिन इस संगठन के नेता डॉ हीरालाल अलावा (35) ने कांग्रेस से गठबंधन के लिए 40 सीटों की मांग कर दी थी. उसके बाद इनके बीच गठबंधन का पेंच फंस गया था लेकिन शनिवार को जब कांग्रेस ने पहली सूची जारी की तो पहले तो लोगों को नाम की स्‍पेलिंग में गलती के कारण कुछ भ्रम हो गया लेकिन बाद में तस्‍वीर साफ हुई कि जयस के नेता डॉ हीरालाल अलावा अपने संगठन को छोड़कर खुद कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर गए हैं. डॉ अलावा एम्‍स में डॉक्‍टर थे और नौकरी छोड़कर सियासी समर में कूदे हैं. मध्‍य प्रदेश में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाला है.

कांग्रेस ने डॉ हीरालाल अलावा को मानावार सीट से अपना प्रत्‍याशी बताया है. हालांकि पहले इस बात की चर्चा हो रही थी कि वह आदिवासी बाहुल्‍य सीट कुछी से चुनाव लड़ना चाहते थे. जयस इस सीट के लिए इसलिए अड़ी थी क्‍योंकि जयस का हेडक्‍वार्टर इसी के अंतर्गत आता है और यहां इसका अच्‍छा-खासा प्रभाव माना जाता है. लेकिन कांग्रेस का इस सीट पर पिछले तीन दशकों से कब्‍जा है. इसलिए कांग्रेस ने इस पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी और पिछली बार जीते हुए प्रत्‍याशी को फिर से टिकट दिया है.
जयस
‘अबकी बार मध्य प्रदेश में आदिवासी सरकार’ का नारा देने वाले जयस के राष्‍ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने पिछले दिनों कहा था, ‘‘जयस ने दो अक्टूबर को धार जिले के कुक्षी में ‘किसान पंचायत’ की थी. इसमें एक लाख से ज्यादा आदिवासी युवा शामिल हुए थे. इससे हमने बता दिया है कि मालवा-निमाड़ में हमारी क्या ताकत है.’’
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक पश्चिम मध्य प्रदेश स्थित मालवा-निमाड़ की 66 विधानसभा सीटों में से 28 आदिवासी बाहुल्‍य सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने डॉ अलावा को अपने पाले में किया है. दरअसल इन 28 सीटों में से 22 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं और इन 22 सीटों में से कांग्रेस की झोली में वर्तमान में केवल पांच सीटें ही हैं.
मालवा-निमाड़ अंचल
वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ की इन 66 सीटों में से बीजेपी ने 56 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को केवल नौ सीटों से संतोष करना पड़ा था. बीजेपी के बागी नेता के खाते में एक सीट आई थी जिसने अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था.