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गए थे वित्तमंत्री का फार्म भरवाने मिल गई टिकट

Patrika 2018-11-06 13:32:59

दमोह. भाजपा ने जबेरा विधानसभा में धर्मेंद्र सींग लोधी को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। सोमवार को धर्मेंद्र सींग तहसील कार्यालय दमोह विधानसभा से वित्तमंत्री का फार्म भरवाने पहुंचे थे, जब तक उन्हें पता नहीं था कि वे स्वयं जबेरा से दावेदारी करेंगे। तहसील कार्यालय से अपने गांव नोहटा जा रहे थे कि बीच रास्ते टिकट की खबर मिली। वहीं से वापस भाजपा कार्यालय में आकर टिकट मिलने की खुशी कार्यकर्ताओं के साथ मनाई।
शैक्षिक व राजनीतिक योग्यता
धर्मेंद्र सींग लोधी 40 वर्ष अभी तक के घोषित दावेदारों में सबसे कम उम्र के युवा हैं। वह बीएससी गणित, एमए हिंदी साहित्य, पीजीडीसीएस के साथ बीएड के योग्यताधारी हैं। वे आरएसएस के सागर व दमोह के विभाग बौद्धिक प्रमुख रहे हैं। तीन साल पहले भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। वर्तमान में भाजपा के जिला महामंत्री पद पर कार्यरत हैं। उनके पिता भावसींग लोधी आरएसएस के बड़े नामों में शुमार हैं। जिससे यह टिकट आरएसएस खेमे से भी मानी जा रही है।
प्रोफेशन- कृषि व जेसीबी मशीन किराए से आय।
लाइफ स्टाइल- कुर्ता पायजामा, पेंट शर्ट
सोशल मीडिया- फेसबुक, वॉटसएप, टिवटर पर सक्रिय।
पहचान
आरएसएस में बौद्धिक प्रमुख रहने पर धीर गंभीर, स्वच्छ राजनीति के पक्षधर युवा हैं। कम शब्दों में अपनी बात कहना। अनुशासन में रहकर पार्टी लाइन पर काम करना। सभी कार्यक्रमों में लगातार सक्रियता। साथ ही पिता भाव सींग लोधी की पारिवारिक पृष्ठ भूमि प्लस पाइंट है।
राजनीतिक अनुभव
आरएसएस में समाज कार्यों का लंबा अनुभव है। भाजपा संगठन में तीन साल का जिला महामंत्री पद का अनुभव ही राजनीति का आधार है।
मौके और झटके
राजनीति में तीन साल के अनुभव में धर्मेंद्र सींग लोधी को अभी राजनीतिक झटके का सामना नहीं करना पड़ा, उन्हें विधानसभा की टिकट मिलने से जीवन का बड़ा मौका मिल गया है। जबेरा विधानसभा में कई बड़े नाम सामने आने से वह टिकट मिलने की उम्मीद भी नहीं रखे थे। जिससे अब वे अपने दस्तावेज तैयार कराकर फार्म भरने की तैयारी में जुट गए हैं।
कोर टीम -
भाजपा जिलाध्यक्ष देवनारायण श्रीवास्तव।
इनका मुख्य विजन
विधानसभा क्षेत्र के समस्त लोगों का विकास करना। जबेरा अंचल सूखा क्षेत्र होने से पेजयल, सड़क, बिजली समस्या के निदान का मुख्य संकल्प है। अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के वचनबद्ध हैं।
नफा-नुकसान
पिता भावसींग के लंबी राजनीतिक पहचान का फायदा मिल सकता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़े विधानसभा क्षेत्र में नया चेहरा, पहचान का संकट नुकसानदायक साबित हो सकता है। बड़े नामों को टिकट न मिलने से अंतर विरोध भितरघात की ज्यादा संभावना बढ़ गई है। कुछ भाजपाईयों के बगावत कर निर्दलीय मैदान में आने की आशंका भी है।