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akbar aur birbal की पहली मुलाक़ात कैसी हुई थी, पढ़िए कहानी

Dvi News 2018-11-09 14:01:49

akbar aur birbal ke kisse- अकबर और बीरबल के किस्से हम बचपन से सुनते आ रहे हैं जिसमें बीरबल की बुद्धिमत्ता और होशियारी का जवाब नहीं लेकिन एक सवाल हमेशा मन में आता होगा कि आखिर इतना अनमोल रत्न राजा अकबर तो कैसे मिला होगा.

चलिए तो आज हम आपको अकबर और बीरबल की मुलाकात के बारें में बतातें हैं कि आखिर कैसे राजा अकबर को बीरबल मिलें और इन्होंने बीरबल को कैसे अपने नौ रत्नों में शामिल किया. आप सोच रहे होंगे कि नौ रत्न . बता दे कि अकबर के दरबार में बहुत की ज्ञानी महापुरूष रहतें थे जो अकबर को दिशानिर्देंश देते थे जिस कारण राजा अकबर हमेशा से ही विजयी होता आया था. वहीं बुद्धिमान लोग राजा के नौ रत्न कहलाते हैं और उनका एक हिस्सा बीरबल भी था.

जानिए कैसे मिले अकबर को बीरबल- अकबर और बीरबल कहानी

अकबर और बीरबल की कहानी इन हिंदी– दरअसल राजा-महाराजा खाना खाने के बाद में पान खाना पसंद करते थे जिसके लिए उन्होंने मुरलीधर नाम के व्यक्ति को केवल पान बनाने के लिए रख रखा था. एक दिन वह अकबर को पान देकर घर जा रहा था कि एक सिपाई ने उसे रोक लिया और बोला तुम्हें महाराज ने बुलाया. मुरलीधर बोला कि भाई में अभी वहीं से आ रहा हूँ वो बोला मुझे कुछ मालुम नहीं तुम मेरे साथ चलो. मुरलीधर अकबर के पास जाकर बोला आज्ञा महाराजा. अकबर ने कहा कि तुम कल 1 किलो चूना लेकर आना. मुरलीधर बोला जी हुजूर ले आऊंगा.

अगले ही मुरलीधर चुना लेकर महल की ओर जा रहा होता हैं तो रास्तें में उसे उसका प्रिय मित्र महेशदास मिल जाता हैं. जिसकी बुद्धिमत्ता के चर्चें हर जगह पर थे. वह मुरलीधर से बोला कि अरें भाई आज इतना चूना लेकर कहां जा रहे हो. मुरलीधर बोला क्या बतायें राजा अकबर ने मंगवाया हैं. यह सुनकर महेशदास बोला क्यों क्या करेंगे महाराज इस चूने का.  

akbar aur birbal ke chutkule

मुरलीधर कुछ नहीं जानता था इसलिए महेशदास समझ गया कि मेरे मित्र के प्राण संकट में और वो मुरलीधर से बोला कि कहीं ये तुम्हें ही ना खाना पड़े इसलिए मेरी बात मानों और 1 किलो घी पीकर ही महल जाना. ऐसा कहकर हसंते हुए महेशदास चला गया अब क्या था मुरलीधर ने सोचा महेशदास की हर बात सहीं ही होती हैं मैं घी पीकर ही जाऊंगा.

इधर अकबर आग बबुले हो रहे हैं कि मुरलीधर अभी तक क्यों नहीं आया इतने ही मुरलीधर आ जाता हैं फिर क्या था. अकबर बोले चूना लाए हो वो बोला हां महाराजा क्या करना हैं. अकबर ने कहा कल तुमने हमारे पान में इतना चूना मिला दिया कि हमारा मुंह कट गया. इसकी सजा यह हैं कि तुम्हें ये सारा चूना खाना होगा.

अब मुरलीधर महेशदास को मन ही मन में धन्यवाद दे रहा था और सैनिक के सामने ही सजा में सारा चूना खा लिया. महाराज के लिए पान लेकर उनके कक्ष में पहुंच गया और लीजिए महाराज आपका पान. मुरलीधर को देखकर अकबर चौंक उठा और तुम जिंदा कैसे हो. मुरलीधर बोला कि महाराज मैंने 1 किलो घी पी रखा था इसलिए मेरे प्राण बच गए. अकबर बोला तुम जानते थे कि चुना तुम्हें खाना पड़ेगा वह बोला नहीं मुझे तो मेरे मित्र मोहनदास ने कहा था कि ये चूना तुम्हें खाना पड़ सकता हैं इसलिए अपने प्राण बचाने के लिए घी पीकर जाना.

इस तरह अकबर ने मोहनदास को महल बुलाया और इनाम देते हुए कहा कि हम तुम्हारीं चतुराई से प्रसन्न हुए आज तुम्हारा नाम बीरबल होगा और आज से तुम हमारे नौ रत्न का हिस्सा हो. इस तरह अपना होशयारी से मोहनदास बीरबल बना और मित्र के प्राण बचाते हुए अकबर के प्रिय भी बन गए. दोस्तों आपको हमारी पोस्ट कैसी लगीं हमें कमेंट करके बताएं.