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प्रतापगढ़ के दबंग विधायक राजा भैया की बायोग्राफी पढ़िए हिंदी में

BEST NEWSSS 2018-11-09 14:11:09

राजा भैइया का जन्म 31 अक्टूबर 1967 को प्रतापगढ़ के भदरी रियासत में पिता श्री उदय प्रताप सिंह और माता श्रीमती मंजुल राजे के यहाँ हुआ|इनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे|राघुराज के पिता राजा उदय प्रताप सिंह VHP व RSS के मानद पादाधिकारी रह चुके हैं|इनकी माता श्रीमती मंजुल राजे भी एक शाही परिवार की है|राजा भैया अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश किया|रघुराज प्रताप सिंह की प्राथमिक शिक्षा नारायणी महाप्रभु बाल विद्यालय से हुई|

सन 1985 में भारत स्काउट एंड गाइड हाईस्कूल से दसवी तथा सन 1987 में इलाहाबाद के एक इंटरमीडिएटस्कूल से बारहवी की पढ़ाई की|लखनऊ विश्वविद्यालय से इन्होंने कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की|घुड़सवारी और निशानेबाजी के शौकीन राजा भैया लखनऊ विश्वविद्यालय से मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक हैं|Raja bhaiya के बारे में कहा जाता है कि वे साइकिल चलाने से लेकर हवाई जहाज उड़ाने तक का कारनामा करते हैं|रघुराज उर्फ़ राजा भैया का विवाह बस्ती रियासत की राजकुमारी भानी देवी से हुआ|इनके दो पुत्र शिवराज एंव बृजराज दो पुत्रियाँ राघवी और बृजेश्वरी है।

रघुराज प्रताप सिंह ने kunda की सीट से 1993 में राज्य स्तरीय चुनाव में भाग लिया और विजयी होकर विधायक बने|तब वह सिर्फ 26 वर्ष के थे|सन् 1999 में इंडियन जनरल इलेक्शन में राजकुमारी रत्ना सिंह के खिलाफ अपने चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को उतार दिया|राजा भैया की कद्दावर राजनेता छवि के प्रभाव से उनके भाई भी उस चुनाव में जीत गए थे|भैया ने 1993 में हुए विधानसभा चुनाव से कुंडा की राजनीति में कदम रखा था तब से वह लगातार अजेय बने हुए हैं|उनसे पहले कुंडा सीट पर कांग्रेस के नियाज हसन का डंका बजता था|हसन 1962 से लेकर 1989 तक कुंडा से पांच बार विधायक चुने गए|राजा भैया 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी समर्थित तो 2002 और 2007,2012के चुनाव में एसपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए|

राजा भैया,BJP की KALYAN SINGH सरकार और SP की मुलायम सिंह यादव में भी मंत्री बने|भैया को सन 1997 में बीजेपी के कल्याण सिंह के मंत्रीमंडल में कबानी मंत्री, वर्ष 1999 व 2000 में राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के कैबिनेट में खेल कूद एंव युवा कल्याण मंत्री बनाया गया|साल 2004 में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव की सरकार में रघुराज प्रताप खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री बने|

15 मार्च,2012 को राजा भैया पुनः उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट में कारागार एवं खाद्य एवं रसदमंत्री बने, लेकिन 2 मार्च 2013 को कुंडा में तीहरे हत्याकांड मामले डीएसपी जिया उल हक के हत्या मामले मे राजा भैया का नाम आने पर इन्होने 4 मार्च 2013 को मंत्री पद से इस्तिफा दे दिया|हालांकि बाद में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरोके प्रारंभिक जाँच में ही राजा भैया निर्दोष पाए गए और क्लोजर रिपोर्ट में इन्हें क्लीन चिट मिल गई|CBI की अंतरिम रिपोर्ट में राजा भैया को पूरी तरह क्लीन चिट मिल गयी और 11 अक्टूबर को उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मान सहित पुनः कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया|

राजा की छवि ऐसी है कि उनके महल में लोग न्यायालयषजाने के बजाय उनसे न्याय मांगने आते है जहां पर यह हाथों हाथ ही उनका न्याय कर देते है|इनके के राजनीतिक सफर के साथी रहे कैलाश ओझा ने बताया कि इनके पिता कभी भी अपने बेटे के लिये वोट नहीं मांगते है|वे बहुत ही स्वाभिमानी है|ना ही वे कभी चुनाव प्रचार में अपने बेटे के साथ जाते है|इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि वे कभी वोट देने नहीं जाते|

इन्हे एक बार वर्ष 2002 में mayawati government के समय में जेल भी जाना पडा था|उन पर और उनके पिता uday pratap singh और चचेरे भाई akshay pratap singh पर kidnapping और धोखाधडी के आरोप लगा कर जेल भेज दिया गया था|वे करीब 10 महीने तक जेल में बंद रहे|जिस समय वे जेल में थे तब उनकी पत्नी प्रेग्नेंट थी उन्हें अकेला छोडकर उन्हें जेल में जाना पडा|उनके जेल में रहने के दौरान ही उनकी पत्नि ने दो बच्चों को जन्म दिया|2003 में मुलायम सरकार के आने के बाद उन पर लगाये सारे आरोपों को हटा लिया गया था और वे रिहा हो गये थे|आज उनके दो बेटे और दो बेटियां है|जेल से छुटने के बाद ही वे अपने बेटों को देख पाये थे|

News source-anmolbharat.in