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भाई की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए बहनों ने कूटा गोधन, खिलाई मिठाई

Patrika 2018-11-09 15:52:11

वाराणसी. भाई दूज पर भाई की लंबी उम्र और बेहतर सेहत के लिए कूटा गोधन, माथे पर लगाया तिलक और खिलाई मिठाई। इसके लिए शहर और गांवों के तालबों और खुले स्थान पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लग गई थी। बहनों ने पूरी श्रद्धा से गोवर्धन की पूजा की। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सभी आस्थावान बहने अपने घर, मैदान या सोरोवर पर एकजुट होकर गोधन कूटने की परम्परा को निभाती नजर आई। इस दौरान कथा-कहानी और पूजनकर बहने मूसर से चने को कूटती है जिसे गोधन कूटना कहा जाता है और फिर वही मिठाई और चना भाइयों को खिलाती है। भाई-बहन के इस पर्व का बहनों को पुरे वर्ष इंतज़ार रहता है।

बता दें कि दीपों के त्योहार दीवाली के दूसरे दिन भाई दूज का त्योहार आता है। ये त्यौहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। हर हिंदू त्योहार की तरह इस दिन की भी अपनी अलग कहानी है यानी एक ऐसी पौराणिक कथा जिसके लिए इस दिन को मनाया जाता है।


पौराणिक कथा

सूर्य की संज्ञा से दो संतान थीं पुत्र यमराज और पुत्री यमुना. वहीं सूर्य का तेज बर्दास्त न कर पाने की स्थिति में संज्ञा ने अपनी छायामूर्ति बनाई और दोनों बच्चों के उन्हें सौंपकर चली गईं। हालांकि छाया को यम और यमुना से कोई प्रेम नहीं था।लेकिन दोनों भाई बहनों में बहुत प्यार था। बेहद लगाव के बावजूद यमराज बहुत कामकाज के कारण अपनी बहन से मिलने का वक्त नहीं निकाल पाते थे। एक दिन वे लंबे समय बाद बहन की नाराजगी दूर करने पहुंचे यमराज को देखकर यमुना खुशी से झूम उठीं। यमुना ने भाई का खूब स्वागत किया और ढेरों व्यंजन बनाकर उन्हें खिलाया। यमराज को इतना अधिक प्रेम आदर और सत्कार की आशा न थी।


ऐसे में उन्होंने अपनी बहन यमुना को विविध भेंट समर्पित की, जब वे जाने लगे तो बहन यमुना से बोले अपनी इच्छा का वरदान मुझसे मांग लो। इसपर यमुना ने कहा कि अगर कोई वरदान ही मुझे देना है तो वचन दीजिए कि आज के दिन प्रतिवर्ष आप मेरे यहां आया करेंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे। यमराज ने बहन से वादा किया, तभी से आज तक इस दिन को भाईदूज के रूप में मनाया जाता है। इसे भाई बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

भाई दूज मुहूर्त:
सुबह- 9:20 से 10:35 तक
दोपहर-1:20 से 3:15 तक
शाम-4:25 से 5:35 और 7:20 से रात 8:40 तक