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चंदौली के आदिवासियों को मिले आदिवासी का दर्जा- अखिलेन्द्र मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, कार्यवाही की मांग

TalkToday 2018-12-07 12:28:00

चंदौली, 7 दिसम्बर 2018, चंदौली जनपद की गोंड़, खरवार व चेरो जाति और सोनभद्र जनपद के नगंवा, चतरा और चोपन ब्लाक के कोन क्षेत्र में रहने वाली धांगर (उरांव) आदिवासी जाति और अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिएस्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंहमुख्यमंत्री पत्र भेजा हैं आज अखिलेन्द्र के पत्र को स्वराज अभियान केनेता दिनकर कपूर ने सीएम कार्यालय में दिया।पत्र में सीएम के संज्ञान में लाया गया है कि वाराणसी से अलग हुएजनपद चंदौली की गोंड़, खरवार व चेरो जाति को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जानहीं प्राप्त हुआ है। 7 जनवरी 2003 को जारी हुए भारत सरकार के राजपत्रमें वाराणसी जनपद में इन जातियों को पूर्व की रिपोर्ट के आधार परअनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। जनपद विभाजन के बाद यहजातियां चंदौली जनपद में आ गयी और नौगढ़ तहसील में बड़ी संख्या में रहती है। इस प्रशासनिक चूक के कारण चंदौली जनपद की आदिवासी जातियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। पत्र में सीएम को अवगत कराया गया है कि भारत सरकार द्वारा 1965 में गठित लोकर समिति ने उरांव (धांगर) को मिर्जापुर के दक्षिणी कैमूर रेंज(वर्तमान में सोनभद्र जनपद) में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की संस्तुति की थी। लेकिन सोनभद्र जनपद के चोपन, नगंवा और चतरा ब्लाक में बड़ी संख्या में रहने वाली इस जाति को आज तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया गया। इस कारण इस जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति व अन्यपरम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 का लाभ भीनहीं मिल पा रहा है। गौरतलब हो कि यह आदिवासी जाति पूरे देश में अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आती है। उनसे अनुरोध किया गया है कि उत्तर प्रदेश की उरांव (धांगर) आदिवासीजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करने और चंदौली जनपद की आदिवासी गोंड़, खरवार व चेरों जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए युक्त समाज कल्याण को आवष्यक कार्यवाही करने का आदेष देने का कष्ट करें। दिनकर कपूर स्वराज अभियान ब्यूरो रिपोर्ट-चन्दौली