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कनाडा : चीनी कंपनी की CFO मेंग को किया जाएगा आज अदालत में पेश, चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी

Uttam Hindu 2018-12-07 12:19:55

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : चीन के एक प्रभावशाली कंपनी के अधिकारी को कनाडा ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके कारण कनाडा-चीन के बीच तो गतिरोध बढ़ ही गया है, इस बीच अमेरिका के कूद जाने के कारण चीन ने अमेरिका को भी चेतावनी दे डाली है। आपको बता दें कि चीन की कंपनी हुवावे टेक्नॉलजीज की मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को कनाडा की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है। विधि विभाग के प्रवक्ता इयान मैकलोएड ने बुधवार को बताया कि मेंग वानझोउ को ब्रिटिश कोलंबिया के वैंकूवर से 1 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका मेंग के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। 

चीन ने इस गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया, 'हमने अमेरिका और कनाडा, दोनों पक्षों से अधिकारी की गिरफ्तारी का कारण तुरंत स्पष्ट करने की मांग की है और व्यक्ति के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें तुरंत रिहा करने का आग्रह किया है।Ó 

गिरफ्तार सीएफओ मेंग वानझोउ कोई सामान्य महिला नहीं, बल्कि हुवावे के फाउंडर रेन जेंगफेई की बेटी और कंपनी बोडज़् की डेप्युटी चेयरपसज़्न भी हैं। जेंगफेई चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में इंजिनियर रह चुके हैं। कहा जाता है कि उनका और उनकी कंपनी हुवावे का चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ मजबूत संबंध हैं। इतनी बड़ी अधिकारी की गिरफ्तारी का असर अमेरिका-चीन के व्यापार युद्ध (ट्रेड वॉर) को रोकने के हालिया ऐलान पर असर पड़ सकता है। हुवावे ने कहा कि कंपनी को नहीं लगता कि उन्होंने कुछ गलत किया है। 

दिलचस्प बात यह है कि संयोग से मेंग की गिरफ्तारी उसी रात हुई है जब अर्जेंटिना में आयोजित प्रतिशत 20 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग मिले थे। कनाडा के न्याय विभाग के मुताबिक मेंग की मांग पर उनसे जुड़े तथ्यों के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है।

उनकी जमानत पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। लेकिन, अमेरिका इस बात की जांच कर रहा है कि क्या हुवावे ने क्यूबा, सूडान, सीरिया और ईरान जैसे देशों पर लागू व्यापार नियंत्रण नियमों का उल्लंघन किया है। गौरतलब है की वॉल स्ट्रीट जनज़्ल ने वषज़् की शुरुआत में खबर दी थी कि अमेरिका चीनी कंपनी हुवावे द्वारा ईरान के खिलाफ लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन की जांच कर रहा है। 

न्यू यॉर्क स्थित हॉफ्स्ट्रा यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल के प्रफेसर जुलियन कू ने ट्विटर पर उस कानून की जानकारी दी जिसके आधार पर अमेरिका पाबंदियों का उल्लंघन करने वाली किसी विदेशी कंपनी पर कार्रवाई करता है। कू ने ट्वीट किया, अमेरिकी कानून अमेरिका में निर्मित तकनीक को किसी तयशुदा देशों को निर्यात करने से रोकता है।

जब हुवावे किसी अमेरिकी तकनीक के लाइसेंस के लिए पेमेंट करती है, तो वह ईरान जैसे कुछ देशों को इसका निर्यात नहीं करने का वादा करती है। इसलिए, अमेरिका द्वारा हुवावे को अमेरिका कानून तोडऩे के लिए दंडित किया जाना अतार्किक नहीं है।

न्यू यॉर्क के पूर्वी जिले में प्रॉसिक्यूटर्स मेंग पर लगे आरोपों की छानबीन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि मेंग की गिरफ्तारी अमेरिकी राष्ट्रपति के एग्जिक्युटिव ऑर्डर पर नहीं, बल्कि न्यू यॉर्क की अदालत के आदेश पर हुई है। फिर भी इसका गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अब ब्रिटिश फर्म बीटी ने हुवावे के 5 प्रतिशत नेटवक्र्स के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है। 

हुवावे के साथ-साथ एक और चीनी कंपर्नी को लेकर इन देशों में डर है कि दोनों कंपनियां चीन के लिए खुफिया जानकारियां जुटाती हैं। सीएफओ की गिरफ्तारी के बाद हुवावे की मुश्किल और बढऩे की आशंका है। हालांकि, भारत इस बात से बेपरवाह है और इसने हुवावे को 5त्र ट्रायल का बुलावा भेजा है। 
 

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